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Islamic NATO: सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की के मक्का रक्षा समझौते में शामिल होगा बांग्लादेश? भारत की बढ़ सकती है चिंता

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Islamic NATO: बांग्लादेश की नई सरकार सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते से जुड़ने पर विचार कर सकती है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर की सऊदी अरब और तुर्की के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठकों के बाद इस दिशा में अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश को इस सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनने का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, बांग्लादेश की ओर से अभी तक समझौते में शामिल होने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

Islamic NATO: सऊदी विदेश मंत्री से हुमायूं कबीर की अहम मुलाकात

हुमायूं कबीर गुरुवार को इस्लामिक सहयोग संगठन यानी ओआईसी के विदेश मंत्रियों की 23वीं असाधारण परिषद की बैठक में हिस्सा लेने के लिए सऊदी अरब के जेद्दा पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से अलग से मुलाकात की।

इस बैठक को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सऊदी अरब मक्का रक्षा समझौते से जुड़े देशों में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बातचीत के दौरान बांग्लादेश के इस सुरक्षा व्यवस्था के साथ संभावित जुड़ाव का विषय सामने आया। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है।

Islamic NATO: सऊदी क्राउन प्रिंस के लिए लेकर पहुंचे प्रधानमंत्री का पत्र

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अनुसार, हुमायूं कबीर ने सऊदी विदेश मंत्री से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री तारिक रहमान की ओर से सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नाम एक पत्र भी सौंपा।

दोनों पक्षों ने बांग्लादेश और सऊदी अरब के बीच मौजूदा संबंधों में सकारात्मक प्रगति पर संतोष जताया। साथ ही दोनों देशों ने आपसी साझेदारी को और मजबूत करने तथा उसे नए क्षेत्रों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

Islamic NATO: तुर्की के साथ भी रक्षा सहयोग पर बातचीत

जेद्दा में हुमायूं कबीर की एक और महत्वपूर्ण बैठक तुर्की के विदेश मामलों के उप-मंत्री मूसा कुलाकलिकया के साथ हुई। दोनों अधिकारियों के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई तथा साझा हितों से जुड़े विषयों पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद बताया कि दोनों पक्ष कई क्षेत्रों में आपसी संपर्क और सहयोग बढ़ाने को लेकर सहमत नजर आए। खासतौर पर आर्थिक और रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने में रुचि दिखाई गई।

Islamic NATO: बांग्लादेश के तुर्की से बढ़ते रक्षा संबंध

बांग्लादेश और तुर्की के बीच पिछले कुछ समय से रक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। दोनों देशों के बीच सैन्य और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिशें होती रही हैं। ऐसे में तुर्की के वरिष्ठ अधिकारी के साथ हुमायूं कबीर की बैठक को भी इसी व्यापक सहयोग के संदर्भ में देखा जा रहा है।

बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और आगे ले जाने तथा विभिन्न क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने की इच्छा जताई। इससे बांग्लादेश की विदेश नीति में तुर्की और पश्चिम एशिया के देशों के बढ़ते महत्व के संकेत मिलते हैं।

Islamic NATO: क्या बांग्लादेश बनेगा मक्का रक्षा समझौते का हिस्सा?

मक्का रक्षा समझौते को लेकर बांग्लादेश के संभावित जुड़ाव की चर्चा ने क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच सुरक्षा सहयोग पहले से चर्चा में रहा है। अगर बांग्लादेश भी इस व्यवस्था से जुड़ता है, तो दक्षिण एशिया में इसके रणनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।

हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बांग्लादेश ने औपचारिक रूप से इस समझौते में शामिल होने का फैसला किया है या नहीं। इसलिए इस समय इसे संभावित कूटनीतिक और रक्षा सहयोग के तौर पर ही देखा जा रहा है।

Islamic NATO: भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम

बांग्लादेश का सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के साथ किसी साझा रक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ना भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो सकता है। भारत और बांग्लादेश के बीच भौगोलिक निकटता और लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए ढाका की विदेश और रक्षा नीति में होने वाला बदलाव नई परिस्थितियां पैदा कर सकता है।

खासकर पाकिस्तान और तुर्की की बांग्लादेश के साथ बढ़ती नजदीकी को भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति के नजरिए से देखा जा सकता है। हालांकि, बांग्लादेश के किसी संभावित फैसले के वास्तविक प्रभाव का आकलन तभी किया जा सकेगा, जब उसकी सदस्यता या औपचारिक भागीदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

Islamic NATO: तारिक रहमान के तुर्की दौरे की भी तैयारी

हुमायूं कबीर ने तुर्की के अधिकारी के साथ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री तारिक रहमान के संभावित तुर्की दौरे की जानकारी भी साझा की। बताया गया कि प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बैठक में हिस्सा लेने के लिए तुर्की की यात्रा कर सकते हैं।

इस संभावित दौरे से बांग्लादेश और तुर्की के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग को लेकर और बातचीत होने की संभावना है।

Islamic NATO: बांग्लादेश की विदेश नीति पर नजर

हुमायूं कबीर की जेद्दा में सऊदी और तुर्की के अधिकारियों के साथ हुई लगातार बैठकों ने बांग्लादेश की बदलती कूटनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर बहस जरूर बढ़ा दी है। एक तरफ ढाका सऊदी अरब के साथ अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं तुर्की के साथ रक्षा और आर्थिक सहयोग को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

मक्का रक्षा समझौते में बांग्लादेश की संभावित भागीदारी को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। आने वाले दिनों में बांग्लादेश सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक रुख सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि ढाका वास्तव में इस सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनने जा रहा है या फिलहाल केवल इस प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है।

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