Iran: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच एक नई रिपोर्ट ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन और कुवैत ने इस महीने की शुरुआत में ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। हालांकि, दोनों देशों ने आधिकारिक रूप से ऐसे किसी सैन्य अभियान की पुष्टि नहीं की है। यदि यह रिपोर्ट सही साबित होती है, तो यह पहली बार होगा जब दोनों खाड़ी देश सीधे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से जुड़े दिखाई देंगे।
Iran: वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बहरीन और कुवैत के लड़ाकू विमानों ने ईरान के ड्रोन और मिसाइल भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया। यह कार्रवाई कथित तौर पर इस महीने की शुरुआत में की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने संभावित लक्ष्यों से जुड़ी खुफिया जानकारी और रक्षात्मक हवाई सहायता उपलब्ध कराई।
Iran: दोनों देशों ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की
अब तक बहरीन और कुवैत की सरकारों की ओर से इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की गई है। दोनों देशों ने कथित हमलों पर सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इसलिए फिलहाल इस सैन्य कार्रवाई के दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है।
Iran: जवाबी कार्रवाई की वजह क्या बताई जा रही है
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सप्ताहों में ईरान की ओर से बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा अन्य लक्ष्यों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए थे। दोनों देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पहले से है, जिसके कारण वे लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव के केंद्र में रहे हैं। बताया गया है कि लगातार हमलों के बाद दोनों देशों ने जवाबी कार्रवाई का निर्णय लिया।
Iran: यूएई की भूमिका भी चर्चा में
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने अभियान के दौरान खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षात्मक हवाई सहायता उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई। हालांकि यूएई ने सार्वजनिक रूप से क्षेत्रीय स्थिरता और तनाव कम करने की बात कही है, लेकिन रिपोर्ट में उसे इस समन्वित अभियान का हिस्सा बताया गया है।
Iran: पहली बार सीधे सैन्य कार्रवाई की चर्चा
बहरीन और कुवैत को अब तक अपेक्षाकृत सीमित सैन्य भूमिका निभाने वाले खाड़ी देशों के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में यदि यह कार्रवाई पुष्टि होती है, तो यह दोनों देशों की ओर से ईरानी क्षेत्र के भीतर पहली प्रत्यक्ष सैन्य प्रतिक्रिया मानी जाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि इससे खाड़ी देशों के सुरक्षा दृष्टिकोण में बदलाव के संकेत मिल सकते हैं।
Iran: मिडिल ईस्ट में बढ़ता युद्ध का दायरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र के अधिक देश सीधे सैन्य कार्रवाई में शामिल होते हैं, तो मिडिल ईस्ट का संघर्ष और व्यापक हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर होर्मुज जलडमरूमध्य, समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। तेल बाजार पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है।
Iran: आगे क्या हो सकता है
फिलहाल बहरीन और कुवैत की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह मिडिल ईस्ट के मौजूदा संघर्ष में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव माना जाएगा। दूसरी ओर, यदि संबंधित देश इन रिपोर्टों का खंडन करते हैं, तो क्षेत्रीय घटनाक्रम पर नई कूटनीतिक बहस शुरू हो सकती है। मौजूदा स्थिति में पूरे क्षेत्र पर दुनिया की नजर बनी हुई है।



