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UNSC में भारत ने PoK का उठाया मुद्दा; कहा- जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग

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UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर भारत ने पाकिस्तान को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश परवथानेनी ने खुली बहस के दौरान पाकिस्तान पर PoK में कश्मीरियों के बुनियादी अधिकारों के दमन और मौलिक स्वतंत्रताओं के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और पाकिस्तान को इस मुद्दे पर भ्रामक प्रचार करने के बजाय अपने भीतर झांकने की जरूरत है।

UNSC: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने PoK का मुद्दा मजबूती से उठाया

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के तंत्र को मजबूत करने पर आयोजित खुली बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश परवथानेनी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर विस्तार से अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार देख रहा है कि PoK में रहने वाले लोगों के बुनियादी अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संगठन बनाने के अधिकार का लगातार हनन किया जा रहा है। भारत ने इस मंच से इन घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताया।

UNSC: ‘आठ दशकों से जारी है दमन की नीति’

राजदूत हरीश परवथानेनी ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जो कुछ हो रहा है, वह कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि कई दशकों से अपनाई जा रही एक सुनियोजित नीति का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि लगभग आठ दशक से वहां के लोगों की स्वतंत्रता और अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। भारत के अनुसार यह केवल PoK तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं पर लगातार दबाव देखा जा रहा है।

UNSC: पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी उठाए सवाल

भारत ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के आंतरिक राजनीतिक हालात का भी उल्लेख किया। राजदूत हरीश ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री सहित कई राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी, प्रमुख विपक्षी दलों पर प्रतिबंध और संवैधानिक व्यवस्थाओं में किए गए बदलाव लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं ने पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति को कमजोर किया है और नागरिक अधिकारों पर भी असर पड़ा है।

UNSC: ‘धार्मिक प्रतीकों के सहारे भ्रम फैलाने से बचे पाकिस्तान’

भारत ने पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करने का आरोप भी लगाया। राजदूत हरीश परवथानेनी ने कहा कि पाकिस्तान को घरेलू राजनीति में लाभ लेने या अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने के लिए मनगढ़ंत कथानक तैयार करने के बजाय अपनी वास्तविक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि धार्मिक प्रतीकों और भावनात्मक मुद्दों का उपयोग करके तथ्यों को बदलने की कोशिश समाधान नहीं है। बेहतर होगा कि पाकिस्तान अपने देश में मौजूद समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करे।

UNSC: मानवाधिकार उल्लंघनों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान जरूरी

भारत ने यह भी कहा कि दुनिया के अन्य देशों में जब मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाएं सामने आती हैं तो संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं सक्रिय प्रतिक्रिया देती हैं।

भारत के अनुसार, पाकिस्तान में होने वाले ऐसे मामलों और विशेष रूप से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति पर भी समान गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है ताकि वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

UNSC: पाकिस्तान पर मंच के दुरुपयोग का आरोप

भारत ने पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रतिष्ठित मंच का इस्तेमाल अपने राजनीतिक और विभाजनकारी एजेंडे के लिए करने का आरोप लगाया। राजदूत हरीश ने कहा कि इस प्रकार के प्रयास न केवल तथ्यों से परे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच की गरिमा के भी अनुरूप नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह के दावे वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकते और न ही अंतरराष्ट्रीय कानून के स्थापित सिद्धांतों को प्रभावित कर सकते हैं।

UNSC: जम्मू-कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना स्पष्ट रुख

अपने संबोधन में भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग रहा है, है और रहेगा। भारत ने कहा कि यह केवल राजनीतिक बयान नहीं बल्कि संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता है।

भारत के अनुसार, पाकिस्तान जानबूझकर इस तथ्य की अनदेखी करता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भ्रामक दावे करता रहता है।

UNSC: भारत ने अवैध कब्जे का भी किया उल्लेख

राजदूत हरीश परवथानेनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा वास्तविक लंबित मुद्दा भारत की संप्रभु भूमि पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है।

उन्होंने कहा कि भारत का रुख इस विषय पर पहले भी स्पष्ट रहा है और भविष्य में भी यही रहेगा। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने दोहराया कि सीमा पार से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान तथ्यों, अंतरराष्ट्रीय कानून और पारस्परिक सम्मान के आधार पर ही संभव है।

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