नई दिल्ली: हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की अपनी गंभीर इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका हर साल कनाडा के साथ व्यापार में $200 बिलियन का नुकसान उठा रहा है और कनाडा की सुरक्षा में भी $200 बिलियन से अधिक खर्च कर रहा है। ट्रंप ने सुझाव दिया कि कनाडा को अमेरिका में शामिल करना दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा।
ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कनाडा अपनी संप्रभुता के साथ समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि कनाडा एक स्वतंत्र राष्ट्र है और रहेगा।
ट्रंप की इस टिप्पणी ने कनाडा में राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा दिया है। कनाडाई नागरिकों ने “कनाडा बिकाऊ नहीं है” जैसे नारों के साथ अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुटता दिखाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह टिप्पणी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव पैदा कर सकती है। कनाडा और अमेरिका के बीच घनिष्ठ आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, लेकिन इस तरह की टिप्पणियां इन संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं।
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