ईरान ने अभी तक हिज़बुल्ला और हमास को सक्रिय क्यों नहीं किया?” – 2025 के ईरान-इज़राइल युद्ध में छिपी रणनीति

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हिज़बुल्ला हमास

📍 प्रस्तावना

ईरान और इज़राइल के बीच जून 2025 में छिड़े युद्ध ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। जब इज़राइल ने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया और अमेरिका ने भी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी, तब यह उम्मीद की जा रही थी कि ईरान अपने पुराने सहयोगियों – हिज़बुल्ला (लेबनान) और हमास (गाज़ा) को सक्रिय कर देगा।

लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि अब तक इन संगठनों की ओर से कोई बड़ी या प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई नहीं देखी गई है। तो आखिर ईरान किस रणनीति के तहत इन्हें पीछे रख रहा है?


📚 पृष्ठभूमि: ईरान, हिज़बुल्ला और हमास का संबंध

  • हिज़बुल्ला (Hezbollah):
    • लेबनान में स्थित एक शक्तिशाली शिया संगठन।
    • ईरान का सबसे करीबी मिलिटेंट प्रॉक्सी माने जाते हैं।
    • इज़राइल के खिलाफ कई युद्धों में भाग लिया है (विशेष रूप से 2006)।
  • हमास (Hamas):
    • फिलिस्तीन के गाज़ा क्षेत्र में सक्रिय सुन्नी संगठन।
    • इज़राइल के खिलाफ रॉकेट हमलों के लिए जाना जाता है।
    • ईरान से वित्तीय और हथियारों की सहायता मिलती है।

🤔 अब तक क्यों शांत हैं हिज़बुल्ला और हमास?

1. ईरान की रणनीति: बहुस्तरीय जवाब देने की नीति

  • ईरान सीधे तौर पर इज़राइल पर मिसाइल हमले कर चुका है – यह पहले कभी नहीं हुआ था।
  • अब ईरान अपने मुख्य कार्ड (हिज़बुल्ला/हमास) को अंतिम विकल्प के रूप में बचा रहा है।
  • रणनीति: पहले खुद वार, फिर अगर जरूरत पड़े तो प्रॉक्सी वार।

2. भू-राजनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय संतुलन

  • हिज़बुल्ला की सक्रियता का मतलब है कि लेबनान भी युद्ध में खिंच जाएगा — जो वर्तमान में आर्थिक और राजनीतिक संकट से गुजर रहा है।
  • हमास को सक्रिय करने से इज़राइल गाज़ा पर व्यापक हमला शुरू कर सकता है — इससे फिलिस्तीनी आम जनता का नुकसान होगा।

3. अमेरिका की चेतावनी और सैन्य मौजूदगी

  • अमेरिका ने साफ कहा है कि अगर हिज़बुल्ला या हमास इस युद्ध में शामिल होते हैं, तो स्ट्रैटेजिक टारगेट्स पर अमेरिका जवाब देगा।
  • ईरान नहीं चाहता कि उसके सहयोगी अमेरिका के सीधे निशाने पर आ जाएं।

4. गुप्त गतिविधियाँ? – साइबर अटैक, सीमित फायरिंग

  • ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि हिज़बुल्ला ने सीमा पर हल्की गोलीबारी की है, लेकिन यह केवल प्रतीकात्मक है।
  • हमास की ओर से साइबर गतिविधियाँ, और कुछ सीमित रॉकेट फायरिंग देखी गई हैं – लेकिन कोई बड़ा हमला नहीं।

🧠 ईरान की ‘पैकेज स्ट्रैटेजी’ – युद्ध के 3 चरण

चरणकार्रवाई
चरण 1खुद के बल पर मिसाइल/ड्रोन अटैक (जून 13–22, 2025)
चरण 2क्षेत्रीय प्रॉक्सीज़ को सीमित दायरे में सक्रिय करना (जैसे बगदाद मिलिशिया)
चरण 3अगर इज़राइल ने परमाणु रिएक्शन या लेबनान/गाज़ा पर हमला किया, तो हिज़बुल्ला/हमास पूरी ताकत से एक्टिव होंगे

🔍 हिज़बुल्ला कब एक्टिव होगा?

  • अगर इज़राइल ने लेबनान की सीमा पार की
  • अगर अमेरिका ने ईरान की सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया
  • या अगर ईरान के सर्वोच्च नेताओं को नुकसान पहुंचा

तब हिज़बुल्ला पूरे मोर्चे पर हमला कर सकता है।


🔥 अगर हमास सक्रिय हुआ तो क्या होगा?

  • गाज़ा पर जवाबी हमला निश्चित — जिससे भारी जनहानि होगी
  • इज़राइल एक साथ ईरान, लेबनान और गाज़ा से घिर जाएगा
  • यह स्थिति तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात बना सकती है

🗣️ विशेषज्ञों की राय

“ईरान युद्ध को अपनी सीमा तक सीमित रखना चाहता है। लेकिन अगर हालात बिगड़े तो हिज़बुल्ला और हमास को मैदान में लाने में देर नहीं करेगा।”
– मिडिल ईस्ट सैन्य विशेषज्ञ, डॉ. रहमान अल-नूरी


✅ निष्कर्ष

हिज़बुल्ला और हमास ईरान के वो ट्रम्प कार्ड हैं, जिन्हें वह तभी इस्तेमाल करेगा जब सभी कूटनीतिक और सैन्य विकल्प खत्म हो जाएं।
वर्तमान में ईरान एक नियंत्रित युद्ध नीति पर चल रहा है, लेकिन अगर तनाव बढ़ा, तो इन संगठनों की एंट्री एक भयंकर मोड़ ला सकती है।

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