H-1B Visa: अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी के बाद अपना करियर बनाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा से जुड़ी नई खबर चिंता बढ़ाने वाली है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग यानी DHS ने H-1B वीजा के कुछ आवेदनों पर 103,265 डॉलर की नई फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। यदि यह प्रस्ताव अंतिम नियम का रूप लेता है, तो अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों पर पहले की तुलना में बहुत बड़ा आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी प्रोफेशनल्स को विशेष कौशल वाली नौकरियों में नियुक्त करने का प्रमुख माध्यम है। भारतीय नागरिक लंबे समय से इस वीजा कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल रहे हैं। ऐसे में प्रस्तावित भारी फीस का असर अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों, नौकरी की तलाश कर रहे प्रोफेशनल्स और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
H-1B Visa: 103,265 डॉलर फीस का आया प्रस्ताव
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने H-1B वीजा से जुड़ा नया प्रस्ताव फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया है। इसमें पात्र नए H-1B आवेदनों के लिए 103,265 डॉलर की अतिरिक्त फीस का प्रस्ताव रखा गया है।
यह राशि सामान्य H-1B आवेदन से जुड़ी पारंपरिक फीस की तुलना में कई गुना अधिक है। इसलिए अगर प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में नियुक्त करने वाली कंपनियों के लिए H-1B स्पॉन्सरशिप काफी महंगी हो सकती है।
प्रशासन का तर्क है कि इस शुल्क से कानूनी आव्रजन व्यवस्था को संचालित करने में होने वाले सरकारी खर्च की भरपाई के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सकेगा।
H-1B Visa: भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स पर क्यों पड़ेगा असर?
अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद बड़ी संख्या में भारतीय छात्र वहीं नौकरी पाने और अपने करियर को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। कई कंपनियां ऐसे विदेशी प्रोफेशनल्स को H-1B वीजा के जरिए रोजगार देती हैं।
नई फीस लागू होने की स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान कौन करेगा। आमतौर पर H-1B प्रक्रिया में नियोक्ता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए कंपनियों के लिए किसी विदेशी कर्मचारी को स्पॉन्सर करना पहले की तुलना में काफी महंगा हो सकता है।
इसका असर खासतौर पर उन छात्रों और प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है जो अमेरिका में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के जरिए वहां लंबे समय तक काम करने की योजना बना रहे हैं।
H-1B Visa: हर H-1B आवेदन पर नहीं लगेगी नई फीस
DHS के प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया है कि 103,265 डॉलर की अतिरिक्त फीस सभी H-1B आवेदनों पर लागू नहीं होगी। प्रस्तावित शुल्क मुख्य रूप से कैप-सब्जेक्ट H-1B याचिकाओं से संबंधित है।
अमेरिका हर वित्तीय वर्ष में सामान्य कैप के तहत 65,000 H-1B वीजा उपलब्ध कराता है। इसके अलावा अमेरिकी संस्थानों से उन्नत डिग्री हासिल करने वाले योग्य उम्मीदवारों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा का प्रावधान है।
दूसरी तरफ, कैप-एग्जेम्प्ट H-1B श्रेणी में आने वाले कुछ आवेदन इस प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क से बाहर रह सकते हैं। इनमें आम तौर पर कुछ विश्वविद्यालयों और गैर-लाभकारी संस्थानों से जुड़े मामले शामिल होते हैं।
H-1B Visa: 85 हजार याचिकाओं से 8.8 अरब डॉलर जुटाने का अनुमान
DHS के अनुमान के मुताबिक प्रस्तावित फीस से सरकार को बड़ी मात्रा में अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। विभाग का अनुमान है कि करीब 85,000 H-1B याचिकाओं पर यह शुल्क लागू होने की स्थिति में लगभग 8.8 अरब डॉलर का राजस्व जुटाया जा सकता है।
इस धनराशि का इस्तेमाल केवल DHS से जुड़े खर्चों के लिए ही नहीं, बल्कि कानूनी आव्रजन व्यवस्था से संबंधित दूसरे सरकारी विभागों और एजेंसियों के खर्चों की भरपाई में भी किया जा सकता है।
प्रस्ताव में यह भी संकेत दिया गया है कि सरकार आव्रजन व्यवस्था के प्रशासनिक खर्च को पूरा करने के लिए इस तरह के शुल्क को राजस्व के एक महत्वपूर्ण स्रोत के तौर पर देख रही है।
H-1B Visa: पहले भी 1 लाख डॉलर फीस को लेकर हुआ था विवाद
H-1B वीजा को महंगा करने की दिशा में ट्रंप प्रशासन का यह पहला बड़ा कदम नहीं है। इससे पहले 100,000 डॉलर की H-1B फीस को लेकर भी बड़ा विवाद सामने आया था।
यह प्रस्ताव सितंबर 2025 में सामने आया था। बाद में इस शुल्क को लेकर कानूनी चुनौती दी गई और जून 2026 में अमेरिकी अदालत ने इसे रोक दिया था। अब उस रोक की अवधि 21 सितंबर को समाप्त होने वाली है।
ऐसे में नए 103,265 डॉलर के प्रस्ताव ने H-1B कार्यक्रम को लेकर कानूनी और आर्थिक बहस को फिर से तेज कर दिया है।
H-1B Visa: दोनों फीस एक साथ लगीं तो क्या होगा?
प्रस्तावित नियम में एक अहम स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। यदि पहले वाली 100,000 डॉलर की फीस से जुड़ा राष्ट्रपति का आदेश कानूनी चुनौतियों में टिक जाता है और उसे आगे जारी रखा जाता है, तो प्रस्तावित नई फीस और पुरानी फीस दोनों एक साथ लागू होने की स्थिति बन सकती है।
ऐसा होने पर H-1B वीजा के लिए नियोक्ताओं को बेहद बड़ी रकम चुकानी पड़ सकती है। इससे विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की लागत काफी बढ़ जाएगी और कंपनियों को अपनी भर्ती रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
H-1B Visa: अमेरिका में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले वर्क वीजा में शामिल
H-1B वीजा अमेरिका में विदेशी कुशल कर्मचारियों को रोजगार देने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला प्रमुख वीजा है। खासतौर पर तकनीक, इंजीनियरिंग, शिक्षा, रिसर्च और अन्य विशेष कौशल वाले क्षेत्रों में इसकी बड़ी भूमिका है।
इस वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां ऐसे विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं जिनके पास संबंधित क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता और योग्यता होती है। भारतीय प्रोफेशनल्स लंबे समय से इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल रहे हैं।
H-1B वीजा की मौजूदा सीमा कितनी है?
अमेरिकी कानून के तहत सामान्य H-1B कैप के लिए हर वित्तीय वर्ष में 65,000 वीजा उपलब्ध होते हैं। इसके अलावा अमेरिका में उच्च शिक्षा से जुड़ी पात्र उन्नत डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा का प्रावधान है।
H-1B वीजा आम तौर पर शुरुआती अवधि के लिए जारी किया जाता है और निर्धारित शर्तों के तहत इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। यही वजह है कि अमेरिका में लंबे समय तक काम करने की योजना बना रहे विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए यह वीजा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
H-1B Visa: पहले कितनी होती थी H-1B फीस?
नई प्रस्तावित राशि की तुलना मौजूदा प्रक्रिया से करें तो अंतर काफी बड़ा है। पहले H-1B आवेदन से जुड़ी विभिन्न फीस आम तौर पर कुछ हजार डॉलर के स्तर पर रहती थीं। अलग-अलग परिस्थितियों और आवेदन की प्रकृति के आधार पर वास्तविक लागत अलग हो सकती थी।
अब 103,265 डॉलर की प्रस्तावित अतिरिक्त फीस ने पूरे H-1B सिस्टम की लागत को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। कंपनियों के लिए इतनी बड़ी रकम का भुगतान करना आसान नहीं होगा और इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पर पड़ सकता है।
H-1B Visa: इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स ने उठाए कानूनी सवाल
नई फीस के प्रस्ताव के बाद इमिग्रेशन विशेषज्ञों ने इसके कानूनी आधार को लेकर भी सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्ताव अंतिम नियम में बदलता है तो इसे अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना बनी रहेगी।
इमिग्रेशन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रस्ताव पहले से कानूनी विवाद में रही 100,000 डॉलर की फीस से अलग है। इसलिए अंतिम नियम जारी होने के बाद नई फीस के खिलाफ भी कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
H-1B Visa: प्रस्ताव पर जनता से मांगी जाएगी राय
DHS की ओर से जारी प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले सार्वजनिक प्रतिक्रिया की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रस्ताव के औपचारिक प्रकाशन के बाद इसे निर्धारित अवधि तक सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए रखा जाएगा।
इसके बाद विभाग प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करेगा और जरूरत के अनुसार अंतिम नियम तैयार कर सकता है। यानी फिलहाल 103,265 डॉलर की फीस को अंतिम और लागू शुल्क मानना जल्दबाजी होगी।
H-1B Visa: ट्रंप प्रशासन साल के अंत तक कर सकता है अंतिम फैसला
प्रशासन इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि प्रस्ताव तय प्रक्रिया के बाद मंजूर होता है, तो H-1B वीजा के लिए नई फीस व्यवस्था लागू की जा सकती है।
भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए अब सबसे अहम बात यह है कि अंतिम नियम में किन आवेदनों को शामिल किया जाता है, किन्हें छूट मिलती है और पुरानी 100,000 डॉलर फीस से इसका क्या संबंध रहता है।
H-1B Visa: भारतीयों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
अमेरिका भारतीय छात्रों और तकनीकी पेशेवरों के लिए लंबे समय से प्रमुख शिक्षा और रोजगार बाजार रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के बाद वहां नौकरी की राह चुनते हैं।
H-1B वीजा की लागत में इतना बड़ा बदलाव कंपनियों की भर्ती नीति और विदेशी प्रोफेशनल्स के अवसरों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अभी प्रस्ताव अंतिम नियम नहीं बना है, इसलिए इसका वास्तविक असर तभी स्पष्ट होगा जब DHS पूरी प्रक्रिया पूरी करके अंतिम फैसला जारी करेगा।
फिलहाल 103,265 डॉलर की प्रस्तावित फीस ने अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी की योजना बना रहे भारतीयों के बीच चिंता जरूर बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं, कानूनी चुनौतियों और अमेरिकी प्रशासन के अंतिम फैसले पर सभी की नजर रहेगी।




