BY
Yoganand Shrivastava
Gwalior Food Safety Negligence बारिश का मौसम (चौमासा) दस्तक दे रहा है, लेकिन इसके साथ ही ग्वालियर में महामारियों का एक बड़ा खतरा भी सिर उठा रहा है। शहर के गली-कूचों से लेकर मुख्य बाजारों तक में सुबह के नाश्ते के नाम पर ‘धीमा जहर’ परोसा जा रहा है। कचौड़ी, समोसे, पोहा और जलेबी के ठेलों पर भिनभिनाती मक्खियां और मंडराते खतरनाक कीट-पतंगे साफ गवाही दे रहे हैं कि इस बार का मानसून शहरवासियों को सीधे अस्पताल के बेड पर पहुंचाने की तैयारी में है। इस गंभीर खतरे के बावजूद, जिले का स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा अमला गहरी नींद में सोया हुआ है।
Gwalior Food Safety Negligence गंदगी और लापरवाही का कॉकटेल: खुलेआम बिक रहा दूषित भोजन
शहर के नामचीन प्रतिष्ठानों से लेकर सड़क किनारे लगने वाले ठेलों तक, स्वच्छता के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं:
- कीट-पतंगों का डेरा: कढ़ाई से गरम-गरम उतरने वाली जलेबी और समोसों को बिना ढके छोड़ दिया जाता है। उमस और सीलन के कारण पनप रहे उड़ने वाले कीड़े और नालियों से उठकर आने वाली मक्खियां इन खाद्य पदार्थों पर खुलेआम बैठ रही हैं।
- धूल और प्रदूषण की मार: सड़कों पर उड़ती धूल, वाहनों का जहरीला धुआं और बारिश के मौसम में हवा में मौजूद घातक वायरस इन खुले पकवानों में आसानी से मिल रहे हैं। यह लापरवाही अनजाने में ही सही, लेकिन लोगों की थाली में सीधे तौर पर गंभीर इंफेक्शन परोस रही है।
Gwalior Food Safety Negligence फूड पॉइजनिंग का बढ़ा प्रकोप, उल्टी-दस्त से बेहाल हो रहे लोग
Gwalior Food Safety Negligence दूषित खानपान के कारण शहर में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और फूड पॉइजनिंग के मामलों में अचानक तेजी देखने को मिल रही है:
- अस्पतालों की तरफ दौड़: सुबह का नाश्ता करने के कुछ ही घंटों बाद लोगों को अचानक तेज उल्टी, दस्त, पेट में मरोड़, घबराहट और सिर चकराने जैसी गंभीर शिकायतें होने लगती हैं।
- अदृश्य बैक्टीरिया का हमला: आम जनता इस बात से बेखबर है कि उनकी इस अचानक बिगड़ती तबीयत के पीछे सुबह के नाश्ते के साथ पेट में गए अदृश्य बैक्टीरिया और वायरस हैं। जागरूकता के अभाव और दुकानदारों की मनमानी के कारण लोग लगातार मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
Gwalior Food Safety Negligence दावों में सिमटा विभाग: क्यों मौन हैं CMHO और खाद्य सुरक्षा अमला?
इस पूरी गंभीर स्थिति में सबसे बड़ा और तीखा सवाल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठता है।
सिर्फ कागजी कार्रवाई: हर साल चौमासा आने से पहले बड़ी-बड़ी गाइडलाइंस की बात की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज तक दुकानदारों और ठेले वालों के लिए खाद्य सामग्री को अनिवार्य रूप से ढककर बेचने का कोई सख्त नियम लागू नहीं कराया जा सका है। विभाग की टीमें न तो फील्ड में औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कर रही हैं और न ही नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर कोई ठोस चालानी कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन की इसी ढिलाई और उदासीनता का खामियाजा ग्वालियर की बेकसूर जनता को भुगतना पड़ रहा है। यदि जल्द ही स्वास्थ्य विभाग ने अपनी सुस्ती छोड़कर कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में शहर के सरकारी और निजी अस्पताल मरीजों से पटने तय हैं।





