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सीएम मोहन यादव ने किया वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन का शुभारंभ, जानें पूरी खबर

सीएम मोहन यादव ने किया वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन का शुभारंभ, जानें पूरी खबर

उज्जैन में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आज द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस सम्मेलन में देशभर से आए संत, विद्वान और विशेषज्ञ शामिल हुए।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ 2028 की तैयारियों, मंदिर अर्थव्यवस्था पर चर्चा और भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना है।


सम्मेलन की प्रमुख झलकियां

  • वीर दुर्गादास की छत्री पर संरक्षण और विकास कार्यों का भूमिपूजन।
  • 12 ज्योतिर्लिंग और मंदिर अर्थव्यवस्था पर विशेष सत्र।
  • उज्जैन, ओंकारेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों की आध्यात्मिक शक्ति पर चर्चा।
  • भारत की GDP में 2.5% का योगदान देने वाले धार्मिक पर्यटन को 13% तक ले जाने का लक्ष्य।

पीएचडीसीसीआई और सरकार की पहल

यह सम्मेलन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा पर्यटन मंत्रालय और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के सहयोग से आयोजित किया गया।

  • PHDCCI अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
  • प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि धार्मिक टूरिज्म में 20% की वृद्धि हुई है और मध्यप्रदेश के शहर टॉप 5 में शामिल हैं।
  • भारत की GDP का 2.5% धार्मिक पर्यटन से आता है, जिसे सामूहिक प्रयास से 13% तक बढ़ाया जा सकता है।

सिंहस्थ 2028 पर फोकस

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर कॉर्पोरेट समूहों और मंदिर ट्रस्टों तक सीधी पहुंच बनाना है। इस आयोजन में देश-विदेश से आए 300 से अधिक संत, विचारक और आध्यात्मिक गुरु शामिल हुए।


मंदिर अर्थव्यवस्था और ज्योतिर्लिंग सत्र

सम्मेलन में कई विशेष सत्र आयोजित किए गए हैं, जिनमें:

  1. मंदिर अर्थव्यवस्थाएं: आस्था और आजीविका का संगम – कैसे प्रमुख मंदिर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं।
  2. महाकाल का मंडल – उज्जैन की आध्यात्मिक शक्ति और शहरी विकास पर विमर्श।
  3. मन, शरीर और आत्मा – योग, आयुर्वेद और वेलनेस को नई आध्यात्मिक सीमा के रूप में पहचान।
  4. डिजिटल में दिव्य – आध्यात्मिकता 2.0 – एआई, वीआर और मोबाइल ऐप्स से आध्यात्मिक पहुंच।
  5. पवित्र धुरी के संरक्षक – 12 ज्योतिर्लिंगों का सांस्कृतिक महत्व।

उज्जैन की आध्यात्मिक धरोहर का अनुभव

सम्मेलन के दौरान अतिथि और प्रतिनिधियों ने श्री महाकालेश्वर मंदिर और काल भैरव मंदिर का भी भ्रमण किया। इसके साथ ही PHDCCI और KPMG की रिपोर्ट ‘आस्था और प्रवाह: भारत के पवित्र स्थलों में जनसमूह का मार्गदर्शन’ का विमोचन भी हुआ।


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यह सम्मेलन न सिर्फ उज्जैन बल्कि पूरे भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने का प्रयास है। धार्मिक पर्यटन से न केवल श्रद्धालु जुड़ते हैं, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का भी बड़ा आधार बनता है।

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