G20: अमेरिका के अटलांटा शहर में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक संघर्षों और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने दुनिया के देशों से सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य ताकत के दम पर नहीं निकाला जा सकता, इसलिए बातचीत और कूटनीति को अवसर देना जरूरी है।
Pleased to participate in the 1st Plenary of @g20org Foreign Ministers’ Meeting #Atlanta today. Emphasised that in the face of global challenges, military solutions will not work and diplomacy must be given a chance.
Also highlighted that:
➡️ Global South is disproportionately bearing the consequences of attacks on civilian shipping and seafarers, jeopardising the availability and cost of fuel, food and fertilizers.
➡️ Urgent need to preserve the freedom of navigation and ensure cessation of attacks within the framework of international law, especially UNCLOS. India and Liberia have launched a joint initiative to safeguard seafarers.
➡️ Right to industrialize is being denied through the flooding of markets, weaponizing supply chains, constricting market access and encouraging market distortions. This must cease.
➡️ Importance of building resilient and alternate connectivity, as the world de-risks and diversifies.
➡️ Tactical calculations should not lead to overlooking the dangers of terrorism. It is a high-risk activity which has come back to bite even the practitioners.— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 30, 2026
बैठक के पहले पूर्ण सत्र में जयशंकर ने नागरिक जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने समुद्री रास्तों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन और जहाजों पर हमले तत्काल रोकने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, विकासशील देशों के औद्योगीकरण और आतंकवाद के खतरे पर भी अपनी बात रखी।
G20: सैन्य समाधान नहीं, कूटनीति को मिले मौका: जयशंकर
जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले प्लेनरी सत्र में डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि दुनिया के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों का हल सैन्य तरीकों से नहीं निकाला जा सकता। देशों को विवादों के समाधान के लिए कूटनीति और बातचीत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जयशंकर ने बताया कि उन्होंने वैश्विक चुनौतियों के बीच कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने पर जोर दिया। उनका यह संदेश ऐसे समय आया है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना हुआ है।
जयशंकर का जोर इस बात पर रहा कि सैन्य टकराव से समस्याएं और जटिल हो सकती हैं। ऐसे में देशों को बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
G20: नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमलों का मुद्दा उठाया
जयशंकर ने बैठक में समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नागरिक जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों को निशाना बनाए जाने का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका आर्थिक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है। खासतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों को इसका अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि समुद्री रास्तों पर हमलों और बाधाओं के कारण ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित होती है। इससे इन जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे हालात में विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा समुद्री मार्गों पर हमले रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
G20: समुद्री रास्तों की आजादी और अंतरराष्ट्रीय कानून पर जोर
जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर आवागमन की स्वतंत्रता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि नागरिक जहाजों पर हमले तत्काल बंद होने चाहिए और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि यानी यूएन कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) का उल्लेख किया। यह संधि समुद्री क्षेत्रों, समुद्री संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से जुड़े नियमों का ढांचा तय करती है।
जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत और लाइबेरिया ने नाविकों की सुरक्षा के लिए साझा पहल शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य समुद्र में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी भारत के लिए महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है।
G20: ग्लोबल साउथ पर पड़ रहा है संघर्षों का असर
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ के देशों की आर्थिक चुनौतियों को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि समुद्री रास्तों पर अस्थिरता और नागरिक जहाजों पर हमलों का बोझ विकासशील देशों को अधिक उठाना पड़ रहा है।
ईंधन, खाद्य सामग्री और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने से इन देशों में महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। जयशंकर के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर होने वाले संघर्षों का असर केवल युद्ध में शामिल देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था के जरिए दुनिया के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंचता है।
इसी वजह से उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारु बनाए रखने के लिए साझा प्रयासों की जरूरत बताई।
G20: सप्लाई चेन को हथियार बनाने पर जताई आपत्ति
जयशंकर ने वैश्विक व्यापार और औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ देशों के औद्योगीकरण के रास्ते में ऐसी बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, जिनसे उनकी आर्थिक प्रगति प्रभावित होती है।
उन्होंने बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान उतारकर प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने, सप्लाई चेन का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करने, बाजार तक पहुंच सीमित करने और व्यापार में असंतुलन पैदा करने जैसे तरीकों पर सवाल उठाए।
विदेश मंत्री ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से देशों के औद्योगिक विकास के अधिकार पर असर पड़ता है और इसे रोका जाना चाहिए। उन्होंने बदलती वैश्विक परिस्थितियों में मजबूत और वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
G20: आतंकवाद के खतरे को नजरअंदाज न करने की चेतावनी
जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी दुनिया को आगाह किया। उन्होंने कहा कि तत्काल रणनीतिक फायदे या दूसरे राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर आतंकवाद के खतरे की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने आतंकवाद को बेहद जोखिम भरी गतिविधि बताते हुए कहा कि इसे बढ़ावा देने या इसका इस्तेमाल करने वालों को भी इसके नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। उनका संदेश था कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर गंभीरता और सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।
जयशंकर की यह टिप्पणी जी-20 बैठक में उनके प्रमुख हस्तक्षेपों में शामिल रही।
G20: मार्को रुबियो ने कहा- दुनिया के सामने अहम मोड़
इस बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की। सत्र की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय कई आपस में जुड़ी आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने महत्वपूर्ण फैसले लेने का समय है।
रुबियो ने इसे केवल अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए निर्णायक पल बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और खाद्य बाजार, आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता पर कई तरह के दबाव बने हुए हैं।
उन्होंने जी-20 देशों से इन चुनौतियों का मिलकर सामना करने, अपनी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत बनाने और वैश्विक व्यापार व्यवस्था की सुरक्षा के लिए सहयोग करने की अपील की। रुबियो ने समुद्री सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा को आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा अहम विषय बताया।
रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों के बीच हुई बैठक
अटलांटा में हुई जी-20 विदेश मंत्रियों की यह बैठक ऐसे दौर में आयोजित हुई, जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव जारी हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा बाजार, खाद्य आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों पर भी पड़ रहा है।
बैठक में इन मुद्दों के अलावा समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर चर्चा हुई। हालांकि, सदस्य देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए। ऐसे माहौल में जयशंकर ने कूटनीति, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयासों को भारत की प्राथमिकता के तौर पर रखा।
इस तरह जी-20 के मंच से जयशंकर ने एक तरफ सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान की जरूरत बताई, तो दूसरी तरफ नागरिक जहाजों की सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया।


