Turkey: तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने मक्का डिफेंस पैक्ट को लेकर भारत का नाम लेते हुए कहा है कि भारत, इजरायल और ग्रीस जैसे देशों की आलोचनाएं इस गठबंधन के बढ़ते प्रभाव को दिखाती हैं। उन्होंने समझौते को महज कागजी गठबंधन बताने वाली टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा कि यह जल्द ही क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से गेमचेंजर साबित हो सकता है। हालांकि, उनके बयान को भारत के खिलाफ सीधी सैन्य धमकी कहना सही नहीं होगा। फिदान ने किसी हमले या सैन्य कार्रवाई की बात नहीं की, बल्कि गठबंधन की आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया दी।
तुर्की के विदेश मंत्री ने भारत का नाम लेकर क्या कहा?
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने 19 सितंबर को तुर्की के टीवी चैनल एनटीवी को दिए एक इंटरव्यू में मक्का अलायंस को लेकर सवालों के जवाब दिए थे। उनसे पूछा गया था कि भारत, इजरायल, ईरान और ग्रीस जैसे देशों में इस समझौते को लेकर ऐसी टिप्पणियां की जा रही हैं कि यह गठबंधन केवल कागजों तक सीमित रह सकता है।
इस पर फिदान ने कहा कि जब भारत, इजरायल और ग्रीस जैसे देशों को इस गठबंधन पर प्रतिक्रिया देते देखा जाता है, तो इससे मक्का अलायंस के महत्व और उसके प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया और गलत सूचनाओं के जरिए इस गठबंधन की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। फिदान ने ऐसी आलोचनाओं को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि तुर्की इन बातों को गंभीरता से नहीं लेता।
Turkey: हाकान फिदान ने नाटो का उदाहरण देकर समझाया
फिदान ने अपने बयान में नाटो का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि तुर्की साल 1952 से नाटो का सदस्य है। नाटो के सामूहिक रक्षा प्रावधान यानी आर्टिकल-5 का इतिहास में बहुत कम इस्तेमाल हुआ है, लेकिन इसके बावजूद किसी ने इस संगठन को कागजी गठबंधन नहीं कहा।
Turkish Foreign Minister says India makes fun of the Mecca Defence Agreement signed between Turkey, Pakistan, and Saudi Arabia, but they don’t take India seriously and just laugh it off.
He added, “In the future, we will make them realise how much of a game changer the Mecca agreement is.”— India Observer (@IndiaObserver23) October 30, 2026
उन्होंने तर्क दिया कि मक्का समझौते पर हस्ताक्षर हुए अभी करीब तीन महीने ही हुए हैं और इसके बावजूद गठबंधन को लेकर तेजी से संस्थागत कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में इसे शुरुआत में ही अप्रभावी बताना उचित नहीं है। फिदान के मुताबिक, इस तरह की टिप्पणियां उन देशों की चिंता को भी जाहिर करती हैं, जो इस गठबंधन के प्रभाव को लेकर आशंकित हैं।
Turkey: मक्का अलायंस को गेमचेंजर बनाने का दावा
तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि मक्का अलायंस को लेकर तीनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत है और इसे प्रभावी व्यवस्था में बदलने के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में यह गठबंधन क्षेत्रीय सुरक्षा के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
फिदान ने कहा कि यह गठबंधन केवल एक समझौते तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके तहत संस्थागत ढांचा तैयार करने और जरूरी पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि मक्का अलायंस जल्द ही एक गेमचेंजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में सामने आएगा।
Turkey: क्या है मक्का डिफेंस पैक्ट?
मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब के मक्का शहर में हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की शामिल हैं। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते का सबसे अहम प्रावधान यह है कि तीनों में से किसी एक देश पर बाहरी सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। समझौते के तहत प्रभावित देश की मदद के लिए बाकी सदस्य उपलब्ध संसाधनों और सैन्य क्षमताओं के आधार पर सहायता कर सकते हैं। इसमें सैन्य सहयोग के अलावा खुफिया जानकारी साझा करना, संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग में साझेदारी और तकनीकी सहयोग जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।
Turkey: सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच क्यों चर्चा में आया समझौता?
मक्का डिफेंस पैक्ट की चर्चा ऐसे समय में तेज हुई है, जब यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। इसी पृष्ठभूमि में तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिशें तेज हुई हैं।
हालांकि, इस समझौते को लेकर एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर सऊदी अरब पर हमले होते हैं, तो पाकिस्तान और तुर्की किस स्तर तक सैन्य सहायता देंगे। तुर्की ने स्पष्ट किया है कि समझौते का मतलब हूतियों के खिलाफ यमन में अपनी सेना भेजना नहीं है। दूसरी ओर, पाकिस्तान और तुर्की की ओर से सऊदी अरब को संभावित सैन्य और तकनीकी सहायता पर विचार किए जाने की खबरें हैं।
Turkey: समझौते की आलोचना और भारत की चिंता का मुद्दा
मक्का डिफेंस पैक्ट को लेकर भारत में चिंता का एक बड़ा कारण पाकिस्तान और तुर्की के साथ सऊदी अरब का बढ़ता रक्षा सहयोग है। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, जबकि तुर्की भी कई मौकों पर पाकिस्तान के रुख का समर्थन करता रहा है। ऐसे में इस त्रिपक्षीय सैन्य समझौते के क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पूर्व भारतीय विदेश सचिव कंवर सिबल ने फिदान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत ने मक्का समझौते की आलोचना नहीं की है। उनके मुताबिक, भारत की चिंता तुर्की और पाकिस्तान के संबंधों तथा भारतीय सुरक्षा पर उनके संभावित प्रभाव को लेकर है। उन्होंने फिदान की टिप्पणी को गैर-जिम्मेदाराना बताया।
Turkey: तुर्की की संसद में भी प्रक्रिया जारी
मक्का डिफेंस पैक्ट पर हस्ताक्षर होने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अक्टूबर 2026 में तुर्की सरकार ने समझौते को संसद की मंजूरी के लिए भेजा था। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, तुर्की की संसद की विदेश मामलों की समिति ने इसे मंजूरी दे दी है। अब इसे संसद के पूर्ण सदन में चर्चा और मतदान के लिए आगे बढ़ाया जाना है। इसलिए समझौते की अंतिम संसदीय मंजूरी की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
कुल मिलाकर, हाकान फिदान का बयान मक्का अलायंस की आलोचनाओं के जवाब में आया है। उन्होंने भारत का नाम जरूर लिया, लेकिन भारत को सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी नहीं दी। दूसरी ओर, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच बन रहा यह रक्षा सहयोग आने वाले समय में दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की सुरक्षा राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


