हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे सीमावर्ती क्षेत्रों में चौकसी और निगरानी बढ़ा दी है। खासकर पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय सेना पूरी सतर्कता के साथ डटी हुई है। इस लेख में हम जानेंगे कि किस तरह सेना एलएसी पर निगरानी, संचार और आधारभूत संरचना को लगातार मजबूत कर रही है।
एलएसी पर तैनाती जस की तस, निगरानी और पुख्ता
भारतीय सेना ने यह स्पष्ट किया है कि पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की तैनाती में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं की गई है। वर्तमान में:
- पारंपरिक गश्त (पेट्रोलिंग) द्वारा नियमित रूप से सीमा पर नजर रखी जा रही है।
- एरियल सर्विलांस और तकनीकी उपकरणों के माध्यम से फॉरवर्ड एरिया पर 24/7 निगरानी जारी है।
सेना के अनुसार, 2020 की घटनाओं के बाद से इंटिग्रेटेड इंटेलिजेंस और सर्विलांस ग्रिड स्थापित किया गया है, जो निरंतर निगरानी और खुफिया सूचना जुटाने में मददगार साबित हो रहा है।
नई पीढ़ी के निगरानी उपकरणों की तैनाती
भारतीय सेना ने एलएसी पर निगरानी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की तैनाती की है। इनमें शामिल हैं:
- MALE ड्रोन (मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस)
- मिनी RPAS (रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम)
- सर्विलांस कॉप्टर्स और RPAV (रिमोट पायलट एयर व्हीकल)
- नैनो ड्रोन और स्वार्म ड्रोन, जो दुर्गम इलाकों में भी नजर रखने में सक्षम हैं।
इन सभी आधुनिक तकनीकों से पूरे उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्र में चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
बेहतर हो रहा संचार तंत्र
पूर्वी लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में संचार व्यवस्था को मजबूत करना एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन अब:
- ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही हैं।
- सैटेलाइट-बेस्ड कम्युनिकेशन सिस्टम को जोड़ा जा रहा है।
- पिछले चार वर्षों में मोबाइल नेटवर्क कवरेज में भी काफी सुधार हुआ है।
इससे सैनिकों और ऑपरेशनल यूनिट्स के बीच संचार तेज, सुरक्षित और सटीक हुआ है।
रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मिल रही रफ्तार
सीमा पर तैनात जवानों तक रसद और आवश्यक सामग्री समय पर पहुंच सके, इसके लिए सड़क निर्माण कार्य को भी प्राथमिकता दी जा रही है:
- बीआरओ (Border Roads Organisation) अग्रिम इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण में जुटा है।
- लेह से अग्रिम चौकियों तक ऑल वेदर कनेक्टिविटी पर फोकस किया जा रहा है।
- अटल टनल और ज़ेड मोड़ टनल का निर्माण पूरा हो चुका है।
- शिंकुन ला और ज़ोजिला टनल का कार्य प्रगति पर है।
- कुल मिलाकर 2330 किलोमीटर सड़कों के विकास की योजना बनाई गई है।
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत की सुरक्षा तैयारियां बेहद मजबूत और सतत हैं। सेना तकनीकी दक्षता, आधारभूत संरचना और रणनीतिक निगरानी को लेकर तेजी से आगे बढ़ रही है। यह न केवल देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है बल्कि सीमा क्षेत्र के विकास के लिए भी अनिवार्य है।





