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Caste Certificate Controversy: प्रतापपुर विधायक शकुंतला पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र पर विवाद

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Caste Certificate Controversy: Controversy over the caste certificate of Pratappur MLA Shakuntala Porte

Caste Certificate Controversy: जिला स्तरीय सत्यापन समिति ने सुनवाई का अधिकार माना, 17 मार्च को अगली तारीख

प्रतापपुर की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 19 फरवरी को जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति, बलरामपुर द्वारा पारित निर्णय को लेकर प्रतापपुर के स्थानीय पत्रकार भवन में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह और अधिवक्ता जेपी श्रीवास्तव ने विधायक के जाति प्रमाण पत्र पर गंभीर सवाल उठाए।

Caste Certificate Controversy: प्रेस वार्ता में बताया गया कि विधायक की ओर से पूर्व सुनवाई में यह तर्क दिया गया था कि जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति को मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। वहीं शिकायतकर्ता धन सिंह धुर्वे और जय सिंह पुसाम की ओर से अधिवक्ता ने छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक स्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम 2013 व नियम 2013 का हवाला देते हुए समिति के अधिकार को वैध बताया।

Caste Certificate Controversy: दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद समिति ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उसे जाति प्रमाण पत्र से संबंधित मामलों की सुनवाई का पूर्ण अधिकार है। साथ ही विधायक को 17 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में अपने जाति प्रमाण पत्र के समर्थन में सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

Caste Certificate Controversy: अनुच्छेद 341 और 342 को लेकर उठे सवाल, प्रमाण पत्र की वैधता पर बहस तेज

प्रेस वार्ता में भानु प्रताप सिंह और जेपी श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी लड़ाई विधायक की जाति को लेकर नहीं, बल्कि कथित रूप से गलत तरीके से बनाए गए जाति प्रमाण पत्र को लेकर है। उनका आरोप है कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार जाति प्रमाण पत्र में आवेदक के पिता का नाम दर्ज होना चाहिए, जबकि विधायक के प्रमाण पत्र में पति का नाम दर्ज है, जो नियमों के विपरीत है।

Caste Certificate Controversy: उन्होंने यह भी कहा कि विधायक का जाति प्रमाण पत्र संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत बनाया गया है, जबकि अनुसूचित जनजाति से संबंधित प्रमाण पत्र अनुच्छेद 342 के तहत जारी होना चाहिए। इस आधार पर उन्होंने प्रमाण पत्र की वैधता पर प्रश्न उठाए हैं।

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फिलहाल मामला जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति में विचाराधीन है और 17 मार्च की सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।