सरेंडर की लगी कतार, लाल आतंक हुआ लाचार, जानिए, वो बड़े फैक्टर जिनसे नक्सली मंसूबे हुए पस्त
रिपोर्ट- कुशल चोपड़ा, एडिट-विजय नंदन
बीजापुर में देश के सबसे बड़े नक्सली आत्मसमर्पण अभियानों में से एक शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार, DKSZC प्रवक्ता रूपेश समेत 140 से अधिक माओवादी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया है। ये नक्सली इंद्रावती नदी पार उसपरी घाट में एकत्रित हो रहे हैं।
भूपाती गैंग के सभी सदस्य भी आत्मसमर्पण के लिए तैयारी में हैं। पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया है और सभी नक्सलियों को हथियारों के साथ जगदलपुर ले जाने की योजना बनाई जा रही है।
छत्तीसगढ़ में यह अभियान महाराष्ट्र, अंतागढ़ और सुकमा में नक्सली गतिविधियों को नियंत्रण में लाने के बाद बीजापुर में लाल आतंक को समाप्त करने का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मौके पर पुलिस ने नक्सलियों के सुरक्षित आत्मसमर्पण के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि इलाके में कानून और व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

यह कदम राज्य और केंद्र सरकार की नक्सलवाद विरोधी रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
बता दें कि मंगलवार और बुधवार को 87 नक्सलियों ने अपने हथियार डाले थे, छत्तीसगढ़ के सुकमा में 27 नक्सलियों के सरेंडर के बाद गढ़चिरौली में भी 60 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसमें कुख्यात माओवादी नेता सोनू उर्फ मल्लोजुला वेणुगोपाल राव भूपति भी शामिल है। जिस पर 10 करोड़ का ईनाम था. ये घटनाक्रम बताता है कि लाल आतंक के खात्मे की नीति कारगर हो रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म करने का ऐलान किया था. उसकी का परिणाम है कि लाल आतंक अब अपनी अंतिम सांस गिन रहा है। अब सवाल ये है कि आखिर वो क्या फैक्टर हैं जिससे लाल आतंक अपने दिन गिनने को मजूबर हो गया।

पहला कारण– ताबड़तोड़ एनकाउंटर से टूटी नक्सलियों की कमर
बीते डेढ़ साल में सुरक्षाबलों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ताबड़तोड़ एनकाउंटर किए जिससे नक्सलियों की रीढ़ टूट गई।
दूसरा कारण- नक्सली आपूर्ति को किया प्रभावित
सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के उन ठिकानों पर भी धावा बोला जो उनके लिए सुरक्षित माने जाते हैं। सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों की हर तरह की आपूर्ति को बाधित कर दिया है। इस कारण से नक्सली संगठनों तक हथियार और राशन नहीं पहुंच पा रहा है।
तीसरा कारण- नियद नेल्लानार योजना का प्रभाव
सरकार ने नक्सल प्रभावित गांवों में विकास पहुंचाने के लिए सरकार ने नियद नेल्लानार योजना की शुरुआत की है। इस योजना का लाभ नक्सल प्रभावित लोगों को मिल रहा है। जिससे नक्सलवाद के खिलाफ उनका मोहभंग हुआ है और वे सुरक्षाबलों को सहयोग दे रहे हैं।
चौथा कारण-बड़े नेताओं के खात्मे से संगठन हुआ कमजोर
लाल आतंक का पर्याय माने जाने वाले सेंट्रल कमेटी मेंबर मोडेम बालकृष्ण, बसवाराजू, जयराम उर्फ चलपति, रेणुका जैसे नक्सलियों का एनकाउंटर कर दिया गया।
पांचवा कारण- नई सरेंडर पॉलिसी
सरकार की नई सरेंडर नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को 120 दिनों के भीतर पुनर्वास की गारंटी दी जाती है. इसमें तीन साल के लिए 10,000 रुपये प्रतिमाह वजीफा, शहरी आवास के लिए जमीन या ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि देने का प्रावधान है. जो नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा में लौटने पर मजबूर कर रही है। यही वो बड़े कारण है कि छोटे बड़े सभी नक्सली सरेंडर की कतार में लगने पर मजबूर हो गए हैं.ये वीडियो आपको पसंद आया तो लाइक करें शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें।





