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अमेरिका में H-1B वीज़ा का नया नियम: लॉटरी खत्म, अब सैलरी तय करेगी चयन

अमेरिका में H-1B वीज़ा का नया नियम: लॉटरी खत्म, अब सैलरी तय करेगी चयन

BY: MOHIT JAIN

अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा प्रणाली में नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें लॉटरी सिस्टम को पूरी तरह से खत्म करने का सुझाव है। इसके तहत अब वीज़ा आवंटन का निर्णय सैलरी के आधार पर होगा। अमेरिकी सरकार का कहना है कि इस कदम से देश में अमेरिकी नागरिकों के लिए नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे और विदेशी कर्मचारियों की भर्ती अधिक पारदर्शी होगी।

सैलरी बनेगी प्राथमिकता का आधार

H-1B वीज़ा जिसे वर्कर वीज़ा भी कहा जाता है, अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों जैसे इंजीनियर, वैज्ञानिक और कंप्यूटर प्रोग्रामर को काम पर रखने की अनुमति देता है।

  • वर्तमान में H-1B वीज़ा का आवंटन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से होता था।
  • नए प्रस्ताव के अनुसार, अब उच्च वेतन वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • इसके अलावा, नए वीज़ा आवेदन पर एकमुश्त $100,000 शुल्क लगाने का सुझाव भी रखा गया है।

अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इससे कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पर रोक लगेगी और अमेरिकी कर्मचारियों के लिए नौकरियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

विशेषज्ञों की चिंताएं

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से अमेरिका की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर असर पड़ सकता है।

  • बड़ी संख्या में उच्च स्तर के कुशल इंजीनियर और टेक एक्सपर्ट्स भारत और अन्य देशों से H-1B वीज़ा के ज़रिए अमेरिका जाते हैं।
  • यदि सैलरी आधारित चयन और अधिक शुल्क लागू हुआ तो स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसाय विदेशी प्रतिभा को आकर्षित नहीं कर पाएंगे।
  • इससे चीन, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देश वैश्विक प्रतिभाओं को अपनी ओर खींच सकते हैं।

कारोबार जगत में मिली-जुली प्रतिक्रिया

अमेरिकी उद्योग जगत में इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग राय हैं:

  • बड़े टेक दिग्गज इसे योग्यता आधारित चयन की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानते हैं।
  • वहीं वित्त और निवेश क्षेत्र के नेता इसे देश की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए खतरा बताते हैं। उनका कहना है कि अत्यधिक शुल्क और सैलरी की शर्तें स्टार्टअप्स और नई कंपनियों के लिए बाधा बन सकती हैं।

H-1B वीज़ा प्रणाली में यह बदलाव अमेरिकी नौकरी बाजार और विदेशी प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण परिणाम ला सकता है। उच्च वेतन आधारित प्राथमिकता से अमेरिकी नागरिकों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं, लेकिन साथ ही टेक्नोलॉजी क्षेत्र में विदेशी प्रतिभा की कमी भी महसूस की जा सकती है।

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