BY: MOHIT JAIN
ब्राजील ने दुनिया की पहली और सबसे बड़ी मच्छर फैक्ट्री खोलकर एक नई दिशा में कदम रखा है। यह सुनकर आप आश्चर्यचकित होंगे कि आम तौर पर मच्छरों को खत्म करने के उपाय किए जाते हैं, लेकिन ब्राजील ने लाखों मच्छरों का उत्पादन शुरू किया है।
इस फैक्ट्री का मुख्य उद्देश्य लोगों की जान बचाना है। यहां पैदा किए जाने वाले मच्छर वोल्बाचिया बैक्टीरिया से संक्रमित होंगे, जो डेंगू, ब्रेक-बोन फीवर, जीका और चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खौफ
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल ब्राजील में डेंगू से 6,297 लोगों की मौत हुई। डेंगू, जिसे ब्रेक-बोन फीवर भी कहा जाता है, बेहद तीव्र दर्द और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। यह एडिज एजिप्टी मच्छरों द्वारा फैलता है और हर साल करोड़ों लोगों को संक्रमित करता है।
वोल्बाचिया बैक्टीरिया और उसका महत्व

वोल्बाचिया बैक्टीरिया मच्छरों के भीतर रहता है और मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। अगर मच्छर मर जाता है तो बैक्टीरिया भी मर जाता है। यह बैक्टीरिया मच्छरों को वायरल संक्रमण फैलाने से रोकता है।
ब्राजील में प्रयोगशाला में तैयार वोल्बाचिया संक्रमित मच्छरों को स्थानीय मच्छर आबादी में छोड़ा जाता है। इससे बैक्टीरिया प्राकृतिक रूप से फैलता है और वायरल संक्रमण कम होता है। यह तरीका 2014 से ब्राजील के आठ शहरों में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है।
मच्छर फैक्ट्री की क्षमता
कुरितिबा में स्थित वोल्बिटो दो ब्राजील प्लांट प्रतिवर्ष करोड़ों मच्छरों का उत्पादन करने में सक्षम हैं। ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से, यह फैक्ट्री देश के लाखों लोगों को डेंगू और अन्य घातक बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करेगी।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी लुसियानो मोरेरा के अनुसार, यह फैक्ट्री हर छह महीने में लगभग 70 लाख लोगों को सुरक्षा प्रदान कर सकेगी।
मच्छरों का वितरण और निगरानी
वोल्बिटो दो ब्राजील अपनी गतिविधियां बढ़ाने के साथ मच्छरों को डेंगू के हॉटस्पॉट्स में रिलीज करेगा। नगरपालिका के अधिकारी डेंगू के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए मच्छरों को छोड़ेंगे। इस तरीके से संक्रमित मच्छर धीरे-धीरे स्थानीय मच्छर आबादी में मिलकर बीमारी फैलने की संभावना को कम करेंगे।
ब्राजील की यह पहल न केवल नवाचार की मिसाल है बल्कि लाखों लोगों की जान बचाने का भी अहम कदम साबित हो रही है। भविष्य में इस तकनीक के और शहरों तक विस्तार होने की संभावना है, जिससे डेंगू जैसी बीमारियों पर काबू पाया जा सके।





