BY: MOHIT JAIN
नेपाल में Gen-Z ने फिर से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को अपने निशाने पर लिया है। Gen-Z समूह ने आठ सितंबर को हुई सरकार विरोधी प्रदर्शनों में गोलीबारी में उनकी कथित भूमिका के चलते गिरफ्तारी की मांग की है।
पूर्व पीएम ओली ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अपने पहले सार्वजनिक बयान में हिंसा की जिम्मेदारी घुसपैठियों पर डालते हुए खुद को बचाव की कोशिश की।
गिरफ्तारी की मांग

Gen-Z समूह के सलाहकार डॉ. निकोलस बुशल ने कहा कि ओली, तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक और काठमांडू के मुख्य जिला अधिकारी छवि रिजाल को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उनकी कथित भूमिका के चलते 19 कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी।
बुशल ने सभी उच्च पदस्थ नेताओं और सरकारी अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए उच्च-स्तरीय जांच आयोग बनाने की भी मांग की।
इसके अलावा, जेन-जेड कार्यकर्ताओं ने सिंह दरबार सचिवालय के पास मैतीघर मंडला में धरना दिया, जहां से उन्होंने आठ सितंबर को विरोध रैली शुरू की थी।
सोशल मीडिया प्रतिबंध और हिंसा
पूर्व पीएम ओली की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए 26 सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाया था। यह कदम जेन-जेड समूह के विरोध का कारण बना।
- आठ और नौ सितंबर की हिंसक घटनाओं में कम से कम 72 लोग मारे गए, जिसमें तीन पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
- सोशल मीडिया पर प्रतिबंध रात को हटा दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश प्रकाश मान सिंह राउत ने स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत ने सोशल मीडिया साइट्स पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था। उन्होंने कहा कि सरकार से केवल आवश्यक कानून बनाकर सोशल मीडिया को विनियमित करने का आग्रह किया गया था।
ओली का बयान और मामले की जांच
73 वर्षीय ओली ने संविधान दिवस के मौके पर कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों पर स्वचालित बंदूकों से गोलियां चलाई गईं, जो पुलिस के पास नहीं थीं।
ओली ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और घुसपैठियों को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया।
नेपाल में Gen-Z की सक्रियता और पूर्व पीएम ओली के खिलाफ उठ रहे सवाल देश में राजनीतिक उथल-पुथल को फिर से उजागर कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्रतिबंध, हिंसा और संपत्ति जांच की मांग ने जनता और राजनीतिक दलों में नई बहस छेड़ दी है।





