report: prempal, by: vijay nandan
फिरोजाबाद जनपद के ढोलपुरा गांव के आईटीबीपी जवान रामनरेश यादव का पार्थिव शरीर शुक्रवार को पैतृक आवास पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। “रामनरेश अमर रहें” के नारों के बीच हजारों लोग अपने लाल को अंतिम विदाई देने पहुंचे।
जानकारी के अनुसार, जवान रामनरेश यादव की तैनाती हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में थी। 14 सितंबर को पहाड़ी पर गश्त के दौरान उनका पैर फिसल गया और वे व्यास नदी में गिर पड़े। उसी दिन उनकी गुमशुदगी दर्ज की गई थी। लगातार तलाश के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला। कुछ दिन बाद एक ग्रामीण ने नदी में शव फंसा देखा और पुलिस को सूचना दी। शव निकालने के बाद पहचान हुई कि वह रामनरेश यादव का ही है।

मात्र डेढ़ साल पहले ही उन्होंने आईटीबीपी में भर्ती होकर देश सेवा का सफर शुरू किया था। पैतृक गांव पहुंचते ही परिजनों के साथ पूरे क्षेत्र की आंखें नम हो गईं। सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनकी शवयात्रा निकाली गई। अंतिम संस्कार के दौरान हजारों लोग शामिल हुए और नम आंखों से अपने वीर जवान को विदाई दी।
भारत-चीन (तिब्बत) सीमा की निगरानी के लिए ITBP जवानों की तैनाती
आईटीबीपी मूल रूप से 1962 के चीन युद्ध के बाद बनाई गई थी। इसका मुख्य काम हिमालयी क्षेत्रों में भारत-चीन (तिब्बत) सीमा की सुरक्षा करना है। कुल्लू ज़िला भले सीधा सीमा पर न हो, लेकिन यहाँ से लाहौल-स्पीति, किनौर जैसे संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े इलाकों तक पहुँच होती है। इसलिए आईटीबीपी की कई बटालियनें यहाँ और आस-पास के इलाकों में बेस बनाकर तैनात रहती हैं।
उच्च पर्वतीय प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक बेस
कुल्लू, मनाली और पास के क्षेत्रों में आईटीबीपी के हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर और माउंटेन वारफेयर/रैस्क्यू सेंटर हैं। यहाँ जवानों को बर्फ़, ग्लेशियर, ऊँचाई और कठिन मौसम में ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग दी जाती है।
आपदा एवं बचाव कार्य
हिमाचल प्रदेश में बाढ़, भूस्खलन, हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बार-बार आती हैं। आईटीबीपी को NDRF जैसी भूमिका में यहाँ तैनात कर रखा जाता है ताकि वह चारधाम यात्राओं, ट्रैकिंग रूट, टूरिस्ट क्षेत्रों में फँसे लोगों को तुरंत बचा सके।
सैन्य-नागरिक सहयोग
यह इलाका सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। सड़कें, सुरंगें (जैसे अटल टनल) और सीमाई चौकियों तक रसद पहुँचाने के लिए कुल्लू-मनाली जैसे इलाकों में लॉजिस्टिक्स हब बनाए गए हैं।
कुल्लू और आसपास के क्षेत्रों में आईटीबीपी की तैनाती सीमा सुरक्षा, ऊँचाई वाले इलाक़ों में प्रशिक्षण, और आपदा-बचाव की तैयारियों के लिए की जाती है।





