BY: MOHIT JAIN
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ऐलान किया है कि देश 2027 में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट की मेजबानी करेगा। उन्होंने यह घोषणा रावलपिंडी में एक रोड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के उद्घाटन के दौरान की। हालांकि, उन्होंने समिट की सटीक तारीख का खुलासा नहीं किया।
शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान को अभी से इस ऐतिहासिक आयोजन की तैयारी शुरू करनी होगी। उन्होंने इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने योग्य बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने पर जोर दिया।
तियानजिन समिट के बाद आया बड़ा ऐलान
पाकिस्तान का यह फैसला चीन के तियानजिन में आयोजित हालिया SCO समिट के दो हफ्ते बाद सामने आया है। तियानजिन समिट में पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) का मुद्दा उठाया था।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। SCO के सदस्य देशों ने एक संयुक्त घोषणा में इस आतंकी घटना की कड़ी निंदा की थी।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता पर जोर
SCO देशों ने न केवल पहलगाम हमले बल्कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हुए खुजदार और जाफर एक्सप्रेस पर हुए आतंकवादी हमलों की भी कड़ी निंदा की। सदस्य देशों ने साफ किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मानदंड को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
SCO में पाकिस्तान की भूमिका
यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान इस बड़े संगठन की मेजबानी कर रहा है।
- साल 2024 में पाकिस्तान ने काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट समिट की मेजबानी की थी।
- इस दौरान शहबाज शरीफ ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया था।
- पाकिस्तान सरकार ने उस समय समिट के लिए पूरे देश में तीन दिन की छुट्टी घोषित की थी।
SCO का इतिहास और महत्व
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना जून 2001 में चीन के शंघाई शहर में हुई थी।
- शुरुआत में यह केवल 6 देशों का समूह था, लेकिन अब यह एशिया, यूरोप और अफ्रीका के 26 देशों तक फैल चुका है।
- संगठन में 10 सदस्य देश, 2 ऑब्जर्वर देश और 14 डायलॉग पार्टनर शामिल हैं।
- चीन, रूस और भारत जैसे बड़े उभरते देशों की मौजूदगी से SCO दुनिया की लगभग आधी जनसंख्या और एक चौथाई वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है।
क्यों अहम है पाकिस्तान के लिए SCO समिट
पाकिस्तान के लिए 2027 का SCO समिट न केवल उसकी विदेश नीति को मजबूत करेगा बल्कि देश की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को भी दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का मौका देगा। इस समिट के जरिए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि मजबूत करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।





