10 साल का अजय बना हीरो: आगरा में मगरमच्छ से भिड़कर पिता की जान बचाई

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10 साल का अजय बना हीरो: आगरा में मगरमच्छ से भिड़कर पिता की जान बचाई

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक 10 साल के बच्चे ने जो साहस दिखाया, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। चंबल नदी किनारे पानी भरते समय जब उसके पिता पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया, तब उस बच्चे ने हिम्मत दिखाते हुए डंडे से मगरमच्छ पर हमला कर अपने पिता की जान बचाई।

यह घटना बासौनी थाना क्षेत्र के झरनापुरा हरलालपुर गांव की है, जो अब इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।


घटना कैसे घटी?

  • वीरभान, जो कि पेशे से किसान हैं, शुक्रवार को अपने बच्चों अजय (10) और किरन के साथ चंबल नदी पर पानी भरने गए थे।
  • जैसे ही वीरभान ने नदी में पानी भरने के लिए बोतल डुबाई, वहां छिपे मगरमच्छ ने उनके पैर पर झपट्टा मारा और उन्हें नदी में खींचने लगा।
  • वीरभान मदद के लिए चिल्लाने लगे, लेकिन पानी में फंसे होने के कारण खुद को नहीं छुड़ा पा रहे थे।

बेटे की बहादुरी ने बचाई जान

  • नदी किनारे खड़े अजय ने अपने पिता की चीखें सुनीं और बबूल की लकड़ी से मगरमच्छ पर हमला शुरू कर दिया।
  • उसने 10–12 बार डंडे से मगरमच्छ को मारा।
  • लगातार वार होने के बाद मगरमच्छ ने वीरभान को छोड़ दिया और अजय की तरफ लपका, लेकिन बच्चा फुर्ती से बच निकला।
  • वीरभान भी किसी तरह पानी से बाहर निकल आए।

अस्पताल में भर्ती, स्थिति स्थिर

  • वीरभान के दाहिने पैर में गंभीर चोटें आई हैं।
  • उन्हें पहले बाह सीएचसी और फिर आगरा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
  • फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

कौन है यह बहादुर बच्चा?

  • अजय झरनापुरा गांव के सरकारी स्कूल में चौथी कक्षा का छात्र है।
  • वह न सिर्फ पढ़ाई करता है बल्कि अपने पिता के साथ खेतों में भी काम करता है।
  • घटना के समय वह अपनी बहन के साथ वहीं मौजूद था और उसी ने सूझबूझ दिखाकर हालात पर काबू पाया।

क्यों है यह कहानी खास?

  • यह सिर्फ एक मगरमच्छ के हमले की कहानी नहीं है, बल्कि एक 10 साल के बच्चे के साहस, समझदारी और पारिवारिक प्रेम की मिसाल है।
  • यह घटना यह भी दर्शाती है कि बच्चों को प्राकृतिक खतरों और आत्मरक्षा की प्राथमिक जानकारी देना कितना जरूरी है।

अजय की बहादुरी ने साबित कर दिया कि उम्र नहीं, हौसले बड़े काम आते हैं। आगरा की यह घटना न केवल दिल को छूने वाली है, बल्कि प्रेरणादायक भी है। प्रशासन और समाज को ऐसे बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि उनके जैसे अन्य बच्चे भी समाज के लिए उदाहरण बन सकें।

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