BY: Yoganand Shrivastva
कानपुर: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की मंत्री प्रतिभा शुक्ला अपनी ही सरकार की पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठ गईं। यह धरना अकबरपुर थाने के बाहर हुआ, जहां वह लगभग 6 घंटे तक बैठीं रहीं। मंत्री का आरोप था कि उनके कार्यकर्ताओं पर झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है और पुलिस ने अशोभनीय व्यवहार किया। हालांकि, अधिकारियों द्वारा जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद उन्होंने धरना समाप्त कर दिया।
क्यों नाराज हुईं मंत्री?
अकबरपुर क्षेत्र के बदलापुर इलाके में विधायक निधि से बनाई जा रही सड़क को एक स्थानीय सभासद ने रुकवा दिया था। सूचना मिलने पर मंत्री मौके पर पहुंचीं और निर्माण कार्य फिर से शुरू करवाया। इसके बाद सभासद के खिलाफ ठेकेदार ने मुकदमा दर्ज कराया, जिसके जवाब में अगले दिन सभासद समर्थकों ने मंत्री के 5 कार्यकर्ताओं पर क्रॉस एफआईआर दर्ज करा दी। इस पर मंत्री ने नाराजगी जताई और थाने में धरने पर बैठ गईं। उनका आरोप है कि थानेदार ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की और झूठे मुकदमे दर्ज किए।
अखिलेश यादव का वार
इस घटना पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर लिखा,
“सत्तारूढ़ दल की मंत्री खुद ही पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठी हैं, मुख्यमंत्री को इससे ज्यादा क्या सबूत चाहिए?
भाजपा जाएगी तो कानून व्यवस्था लौटेगी।”
अखिलेश ने धरने से संबंधित एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें मंत्री के पति और पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से फोन पर बातचीत करते दिख रहे हैं। वह इसमें कह रहे हैं,
“आप कहें तो राजनीति छोड़ दें या फांसी पर लटक जाएं? हमें डिप्टी सीएम इसलिए नहीं चाहिए जो ब्राह्मणों की रक्षा न करे।”
धरना खत्म करने से पहले हुई कार्रवाई
विवाद बढ़ने पर कानपुर देहात के एसपी अरविंद मिश्रा और डीएम मौके पर पहुंचे और मंत्री व उनके पति को मनाने का प्रयास किया। अंततः पुलिस ने लालपुर चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया और मामले की जांच का भरोसा दिया। इसके बाद मंत्री और उनके समर्थकों ने धरना समाप्त किया।
विपक्ष को मिला मुद्दा
हालांकि धरना अब समाप्त हो चुका है, लेकिन एक मंत्री का अपनी ही सरकार की पुलिस के खिलाफ बैठ जाना, सरकार के कामकाज और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विपक्ष को भी इस घटनाक्रम ने सरकार पर हमला बोलने का ताजा मौका दे दिया है।





