राहुल गांधी का RSS पर हमला: “संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहते हैं” | राजनीति समाचार

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राहुल गांधी RSS हमला

नई दिल्ली | 27 जून 2025: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संघ का असली चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS और बीजेपी संविधान की जगह ‘मनुस्मृति’ लागू करना चाहते हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना (Preamble) से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ये शब्द इमरजेंसी के दौरान जोड़े गए थे और डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाए गए मूल संविधान में ये शामिल नहीं थे।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा:
“RSS का नकाब फिर उतर गया। संविधान उन्हें चुभता है क्योंकि वह बराबरी, धर्मनिरपेक्षता और न्याय की बात करता है। RSS और बीजेपी संविधान नहीं चाहते, वो मनुस्मृति चाहते हैं। उनका असली एजेंडा गरीबों और वंचितों के अधिकार छीनना और उन्हें दोबारा गुलाम बनाना है।”

उन्होंने आगे कहा कि वे कभी भी RSS के इस एजेंडे को सफल नहीं होने देंगे। राहुल गांधी ने कहा, “हर देशभक्त भारतीय आखिरी सांस तक संविधान की रक्षा करेगा।”

विपक्ष ने भी जताई नाराजगी

दत्तात्रेय होसबाले की इस टिप्पणी को लेकर अन्य विपक्षी दलों ने भी नाराजगी जाहिर की।

  • कांग्रेस ने इसे “संविधान की आत्मा पर हमला” करार दिया।
  • आरजेडी, आप और माकपा समेत कई दलों ने भी RSS पर संविधान बदलने की साजिश रचने का आरोप लगाया।

दत्तात्रेय होसबाले ने क्या कहा?

एक कार्यक्रम के दौरान होसबाले ने कहा,
“जब देश में आपातकाल लगाया गया, तब संसद नहीं चली, न्यायपालिका निष्क्रिय हो गई और उस समय प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द जोड़े गए। यह शब्द मूल संविधान में नहीं थे।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर कई बार चर्चा हुई, लेकिन कभी इन शब्दों को हटाने का प्रयास नहीं किया गया।

कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस का कहना है कि RSS ने कभी संविधान को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया और अब उसे कमजोर करने की साजिश रच रहा है। पार्टी ने कहा कि ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने की मांग भारत के संविधान के मूल विचारों पर हमला है।


निष्कर्ष

संविधान को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। जहां RSS और उसके समर्थक प्रस्तावना की समीक्षा की बात कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला मान रहा है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और कितनी राजनीतिक गर्मी पैदा करता है।


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