दक्षिण भारत में मौसम का तांडव: केरल में मूसलधार बारिश से हालात बेकाबू, तीन जिलों में ‘रेड अलर्ट’, नदियों का बढ़ा रौद्र रूप

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BY: Yoganand Shrivastva

मानसून ने दक्षिण भारत के द्वार पर दस्तक क्या दी, केरल में जैसे आसमान ही फट पड़ा हो। बृहस्पतिवार को केरल में तेज बारिश और तूफानी हवाओं ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। निचले इलाके जलमग्न हो गए, पेड़ धराशायी हो गए, और जगह-जगह होर्डिंग्स गिरने से यातायात बाधित हुआ। हालात इतने गंभीर हो गए कि भारतीय मौसम विभाग (IMD) को राज्य के तीन जिलों — इडुक्की, मलप्पुरम और वायनाड — के लिए रेड अलर्ट जारी करना पड़ा।


अलर्ट की तीन श्रेणियां और इसका मतलब

  • रेड अलर्ट: 24 घंटे में 20 सेंटीमीटर से अधिक की अत्यधिक बारिश की चेतावनी।
  • ऑरेंज अलर्ट: 11 से 20 सेंटीमीटर तक भारी वर्षा की संभावना।
  • येलो अलर्ट: 6 से 11 सेंटीमीटर तक सामान्य से भारी बारिश का संकेत।

IMD ने सात अन्य जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिससे यह स्पष्ट है कि खतरा केवल सीमित इलाकों तक नहीं, बल्कि पूरे राज्य में फैला है।


नदियों में उफान: बाढ़ का खतरा बढ़ा

बारिश का कहर केवल आसमान से नहीं, बल्कि जमीन पर बहती नदियों के रौद्र रूप में भी देखा जा रहा है। राज्य सिंचाई विभाग ने चेतावनी जारी की है कि कई प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है:

  • मुवत्तुपुझा नदी – एर्नाकुलम
  • भरतपुझा नदी – त्रिशूर और मलप्पुरम
  • अचनकोविल और पंबा नदी – पथनमथिट्टा
  • मणिमाला नदी – कोट्टायम
  • थोडुपुझा नदी – इडुक्की
  • कबानी नदी – वायनाड

इन क्षेत्रों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों में घुस चुका है, जिससे सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं और उन्हें राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।


चूरलमाला में उफान पर नदी, खतरे की घंटी

वायनाड जिले के मुंडक्कई-चूरलमाला क्षेत्र में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है। चूरलमाला नदी में आई बाढ़ ने बेली ब्रिज के आसपास जमीन काटनी शुरू कर दी है। तेज बहाव के कारण नदी के किनारे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।

यह वही इलाका है जहां पिछले वर्ष जुलाई में विनाशकारी भूस्खलनों में 200 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। ऐसे में प्रशासन पहले से अलर्ट मोड में है और एनडीआरएफ व स्थानीय एजेंसियों को सक्रिय कर दिया गया है।


सरकार की अपील: नदियों के पास न जाएं, सतर्क रहें

राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि नदियों, पुलों और झीलों के आसपास जाने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। स्कूलों को कई जिलों में एहतियातन बंद कर दिया गया है और बिजली आपूर्ति भी अस्थायी रूप से रोकी गई है।


मानसून ने दिखाई चेतावनी की पहली झलक

केरल में मानसून की यह शुरुआत एक स्पष्ट संदेश है कि इस बार प्राकृतिक आपदाओं का खतरा वास्तविक है। आने वाले दिनों में यदि बारिश इसी तरह जारी रही, तो राज्य को एक और चुनौतीपूर्ण मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

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