Gwalior Ara Mill House Damage Controversy: न्याय के लिए भटक रहा बुजुर्ग, सुनवाई करने वाला कोई नहीं: पड़ोसी के निर्माण से चटका मकान, शिकायत की तो ZO देने लगा धमकी

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Gwalior Ara Mill House Damage Controversy

Gwalior Ara Mill House Damage Controversy मध्य प्रदेश में ‘सुशासन’ और जनसुनवाई के दावों के बीच ग्वालियर से एक बेहद संवेदनशील और परेशान करने वाला मामला सामने आया है। यहां के आरा मिल क्षेत्र के रहने वाले एक बुजुर्ग ओमप्रकाश पिछले 6 महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न्याय मिलना तो दूर, उल्टे उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित बुजुर्ग अब शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

Gwalior Ara Mill House Damage Controversy पड़ोसी के निर्माण कार्य से चटका आशियाना

Gwalior Ara Mill House Damage Controversy बुजुर्ग पीड़ित ओमप्रकाश ने अपने पड़ोसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनके बगल में कुंदन नाम का व्यक्ति रहता है।

  • मकान को पहुंचा नुकसान: पिछले साल कुंदन ने अपने मकान का निर्माण कार्य कराया था। इस निर्माण में बरती गई लापरवाही के कारण बुजुर्ग ओमप्रकाश का आधा मकान बुरी तरह चटक (दरारें आ जाना) गया।
  • पड़ोसी ने झाड़ा पल्ला: जब ओमप्रकाश ने इस नुकसान को लेकर पड़ोसी कुंदन से अपना मकान ठीक कराने की बात कही, तो वह साफ मुकर गया और जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया।

Gwalior Ara Mill House Damage Controversy: CM हेल्पलाइन और कलेक्टर से शिकायत, पर मिला धोखा

पड़ोसी से निराश होकर बुजुर्ग ओमप्रकाश ने न्याय के लिए कानूनी और प्रशासनिक रास्ता अपनाया। उन्होंने ग्वालियर कलेक्टर को लिखित आवेदन दिया और साथ ही मुख्यमंत्री (CM) हेल्पलाइन में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई।

कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस आवेदन को जांच के लिए वार्ड क्रमांक 17 के जोनल ऑफिसर (ZO) रामसेवक शाक्य को मार्क कर दिया। लेकिन न्याय मिलने की बजाय बुजुर्ग की मुश्किलें और बढ़ गईं। पीड़ित का आरोप है कि:

“जांच अधिकारी ZO रामसेवक शाक्य ने मामले को सुलझाने या मदद करने के बजाय उल्टा मुझे ही धमकाना शुरू कर दिया है।”

Gwalior Ara Mill House Damage Controversy “खुद घर ठीक कराने के पैसे नहीं, कभी भी गिर सकती है छत”

दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके बुजुर्ग ने अपनी बेबसी बयां करते हुए कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी सक्षम नहीं है कि वह अपने पैसों से इस टूटे हुए मकान की मरम्मत करा सकें। मकान में आई दरारें इतनी बड़ी हैं कि वह कभी भी जमींदोज हो सकता है। बुजुर्ग ने अंदेशा जताया है कि यदि किसी दिन यह जर्जर हिस्सा गिर गया, तो जान-माल की बड़ी हानि हो सकती है। फिलहाल, पीड़ित बुजुर्ग डरे-सहमे हुए हैं और किसी उच्च अधिकारी से इस मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।

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