दतिया उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई, सभी की नजरें उम्मीदवार चयन पर।
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Vijay Nandan डिजिटल एडिटर
Datia By Election 2026 : मध्य प्रदेश में उपचुनाव का बिगुल बज गया है। निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को कराई जाएगी।
उपचुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आपको बता दें कि दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद रिक्त हुई थी। दिल्ली की कोर्ट द्वारा उन्हें 28 साल पुराने सहकारी बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर सीट को रिक्त घोषित कर दिया था।
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Datia By Election 2026 : दतिया का ‘दंगल’, किसके लिए अमंगल ?
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार दतिया विधानसभा उपचुनाव की अधिसूचना 6 जुलाई को जारी होगी। इसके बाद उम्मीदवार 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, 16 जुलाई को नाम वापसी का अंतिम दिन, निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के साथ चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
Datia By Election 2026 : उपचुनाव का ‘दंगल’, किसके लिए अमंगल
उपचुनाव की अधिसूचना 6 जुलाई को होगी जारी
13 जुलाई तक नामांकन दाखिल करने की समय सीमा
14 जुलाई को होगी नामांकन पत्रों की जांच
16 जुलाई को नाम वापसी का अंतिम दिन
30 जुलाई को होगी दतिया सीट पर वोटिंग
3 अगस्त को चुनाव परिणाम होंगे घोषित
Datia By Election 2026 : कांग्रेस खेलेगी विक्टिम कार्ड या नए चेहरे पर लगाएगी दांव ?
उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। यह उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। सवाल यह है कि भाजपा इस चुनावी मैदान में किसे उतारेगी। क्या एक बार फिर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट मिल मिलेगा..या पार्टी किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी? वहीं, कांग्रेस की रणनीति पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। क्या कांग्रेस सहानुभूति या ‘विक्टिम कार्ड’ खेलते हुए राजेंद्र भारती के परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाएगी, या फिर कोई नया चेहरा सामने लाएगी? यह उपचुनाव मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सरकार के लिए भी साख का सवाल माना जा रहा है।
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वहीं भाजपा संगठन के लिए भी दतिया उपचुनाव प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। चुनाव में क्षेत्रीय और जातिगत समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा भाजपा और कांग्रेस, दोनों को आजाद समाज पार्टी की चुनौती का भी सामना करना पड़ सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी ने दतिया सीट पर प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई थी, इसलिए इस बार भी उसकी भूमिका अहम मानी जा रही है। इन्हीं तमाम राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों पर हम चर्चा करेंगे। लेकिन सबसे पहले दतिया उपचुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आई प्रतिक्रियाओं पर एक नजर डालते हैं।
Datia By Election 2026 : संपादकीय नजरिया
दतिया विधानसभा उपचुनाव भले ही एक सीट का चुनाव हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने कहीं अधिक बड़े हैं। यह चुनाव सिर्फ विधायक चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति की दिशा और दलों की संगठनात्मक ताकत का भी परीक्षण होगा। भाजपा के लिए यह चुनाव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के कामकाज और नए प्रदेश नेतृत्व की स्वीकार्यता का पैमाना बनेगा। वहीं कांग्रेस के लिए यह अवसर है कि वह विधानसभा में खोई हुई एक सीट को वापस हासिल कर राजनीतिक संदेश दे सके। ये उपचुनाव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि यहां स्थानीय समीकरण, जातीय गणित और उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल उम्मीदवार चयन का है। यदि पार्टी पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर दांव लगाती है तो यह उनकी राजनीतिक वापसी का मंच बन सकता है, जबकि किसी नए चेहरे को मौका देना संगठन की नई रणनीति का संकेत होगा।
दूसरी ओर कांग्रेस के सामने भी चुनौती कम नहीं है। पार्टी सहानुभूति के आधार पर राजेंद्र भारती के परिवार को मैदान में उतारती है या नए चेहरे के साथ चुनाव लड़ती है, यह फैसला उसके राजनीतिक संदेश को तय करेगा। इस चुनाव में आजाद समाज पार्टी जैसे दलों की भूमिका भी नजरअंदाज नहीं की जा सकती। पिछले चुनाव में इन दलों ने वोटों का ऐसा समीकरण बनाया था जिसने मुख्य दलों की रणनीति को प्रभावित किया था। कुल मिलाकर दतिया उपचुनाव का परिणाम सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं होगा, बल्कि यह बताएगा कि मध्य प्रदेश में आगामी राजनीतिक मुकाबलों के लिए जनता का मूड किस दिशा में जा रहा है। इसलिए दतिया का यह ‘दंगल’ सत्ता, संगठन और विपक्षी खेमे की राजनीतिक दिशा तय करने वाला उपचुनाव है।
लगभग 20 वर्षों का अनुभव इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का है, जहां कई प्रमुख न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया। पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और खबरों को नई तकनीक व तेज रिपोर्टिंग स्टाइल के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। समाचारों की गहराई, निष्पक्षता और सटीकता पहचान है।