शशि थरूर की सोशल मीडिया पोस्ट से उठे सियासी सवाल: क्या कांग्रेस से अलग राह पर हैं थरूर?

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BY: Yoganand Shrivastva

नई दिल्ली: क्या कांग्रेस सांसद शशि थरूर पार्टी से अलग होने का संकेत दे रहे हैं? हाल के घटनाक्रम और उनके सोशल मीडिया पोस्ट को देखें तो राजनीतिक गलियारों में इस सवाल ने हलचल मचा दी है। खासकर जब उन्होंने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा किया, जिसमें लिखा था—

“उड़ने के लिए अनुमति मत मांगो। पंख तुम्हारे हैं और आसमान किसी का नहीं।”

इस एक लाइन ने न सिर्फ राजनीति में चर्चाओं का दौर छेड़ दिया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि थरूर फिलहाल पार्टी लाइन से कुछ अलग सोच रहे हैं।


थरूर बनाम पार्टी लाइन?

इससे पहले शशि थरूर का एक लेख एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित हुआ था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की तारीफ की थी। उन्होंने लिखा था कि “मोदी की छवि और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता।” इस लेख ने कांग्रेस के भीतर हल्की नाराजगी की लहर पैदा कर दी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा:

“मुझे अंग्रेज़ी नहीं आती, लेकिन शशि थरूर की भाषा पर अच्छी पकड़ है, इसलिए उन्हें CWC में जगह मिली। हमने हमेशा राष्ट्र को प्राथमिकता दी है, लेकिन कुछ लोग अब ‘मोदी पहले’ मानने लगे हैं।”


थरूर का जवाब—इशारों में बहुत कुछ

खरगे के इस बयान के कुछ ही घंटे बाद थरूर ने अपने “उड़ने के लिए अनुमति मत मांगो” वाले पोस्ट के जरिए इशारों में जवाब दे डाला। थरूर का यह अंदाज़ साफ़ करता है कि वह फिलहाल पार्टी के भीतर किसी बेचैनी से गुजर रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है जब थरूर ने कांग्रेस के भीतर मतभेद की बात कही हो। हाल ही में उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा था:

“मैं 16 साल से कांग्रेस में हूं, लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं। इन पर मैं पार्टी के भीतर बात करूंगा। जब समय आएगा, तो खुलकर सामने आऊंगा।”


थरूर के अगले कदम पर अटकलें

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थरूर का रुख कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन सकता है, खासकर तब जब पार्टी विपक्ष में रहते हुए एकजुटता की कोशिश कर रही है। शशि थरूर न केवल केरल में कांग्रेस का मजबूत चेहरा हैं, बल्कि वे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के वक्ता और विचारक भी हैं।

कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि थरूर फिलहाल अपने विकल्प खुले रखे हुए हैं — न तो पार्टी छोड़ने की सीधी घोषणा कर रहे हैं और न ही तीखी आलोचना में उतर रहे हैं। बल्कि, वह एक ‘सॉफ्ट डिफरेंस’ बनाए हुए हैं जो वक्त के साथ गहराता जा रहा है।

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