एम्स भोपाल में बनेगा देश का सबसे बड़ा हर्बल गार्डन – एलोपैथी और आयुर्वेद का संगम

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जब एलोपैथी और आयुर्वेद आएंगे साथ

अब एम्स भोपाल सिर्फ एलोपैथिक इलाज का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का खजाना भी पेश करेगा। एम्स भोपाल और बाबा रामदेव की पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन मिलकर भारत का सबसे बड़ा हर्बल गार्डन बना रहे हैं। यह गार्डन न केवल चिकित्सा के सस्ते और प्रभावी विकल्प पेश करेगा, बल्कि वैज्ञानिक शोध का भी केंद्र बनेगा।

क्या खास है इस हर्बल गार्डन में?

एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि यह गार्डन सामान्य पौधों का संग्रह नहीं होगा। इसमें देशभर से दुर्लभ और औषधीय पौधे लाए जाएंगे—विशेषकर उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों से।

यह पहल भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को संजोने और उसे आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

आदिवासी ज्ञान को मिलेगी वैज्ञानिक पहचान

मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदायों के पास जड़ी-बूटियों से इलाज का समृद्ध मौखिक ज्ञान है, जिसे पीढ़ियों से संरक्षित किया गया है। एम्स और पतंजलि की संयुक्त टीम इस पारंपरिक ज्ञान को संकलित करेगी, फिर उन औषधियों पर रिसर्च किया जाएगा।

लाभ:

  • परंपरागत ज्ञान को वैज्ञानिक आधार मिलेगा
  • नई और किफायती दवाओं का निर्माण संभव होगा
  • ग्रामीण और दूरदराज इलाकों को मिलेगा सस्ता इलाज

तीन चरणों में बनेगा यह हर्बल गार्डन

  1. पहला चरण: आम औषधीय पौधे
    • जो भोपाल के वातावरण में आसानी से उग सकें
    • कम संसाधन में विकसित होने वाले पौधे
  2. दूसरा चरण: आदिवासी क्षेत्रों की खोज
    • एम्स की टीमें मध्य प्रदेश के जंगलों और गांवों में जाएंगी
    • दुर्लभ और पारंपरिक जड़ी-बूटियों की पहचान की जाएगी
  3. तीसरा चरण: पहाड़ी और विदेशी औषधियां
    • उत्तराखंड और अन्य राज्यों की exotic herbs
    • इनके लिए विशेष कृत्रिम वातावरण तैयार किया जाएगा

इंटीग्रेटेड मेडिसिन: भविष्य की चिकित्सा पद्धति

यह पहल नई शिक्षा नीति 2020 की सोच को भी आगे बढ़ाती है, जिसमें सभी चिकित्सा पद्धतियों—एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी—को एक साथ पढ़ाने और इलाज में उपयोग करने की बात कही गई है।

Integrated Medicine यानी मरीज को सर्वोत्तम इलाज, चाहे वो किसी भी पद्धति से हो।

रिसर्च और एजुकेशन के नए द्वार खुलेंगे

  • एम्स के छात्र अब केवल किताबों में नहीं, बल्कि जड़ी-बूटियों को प्रत्यक्ष देख व छू सकेंगे
  • उनके औषधीय गुणों पर प्रयोग और रिसर्च कर सकेंगे
  • आयुष विभाग को इलाज में इन औषधियों का तुरंत लाभ मिलेगा

गार्डन के 5 विशेष खंड

  1. ह्यूमन हेल्थ हर्बल गार्डन – सीधे मानव स्वास्थ्य से जुड़ी औषधियां
  2. रसायन वन – रिसर्च के लिए रासायनिक गुणों का अध्ययन
  3. दुर्लभ औषधि वन – लुप्तप्राय या विलुप्त होने वाली जड़ी-बूटियों का संरक्षण
  4. नवग्रह वाटिका – ज्योतिष और आयुर्वेद के अनुसार ग्रहों से जुड़ी औषधियां
  5. अमृता वन – जीवनदायिनी पौधों का समावेश

परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम

एम्स भोपाल का यह हर्बल गार्डन सिर्फ एक बगीचा नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु बनने जा रहा है। यह न केवल मरीजों को नई आशा देगा, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को भी समृद्ध करेगा।

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