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मुठभेड़ से बच निकली महिला माओवादी ने किया आत्मसमर्पण, संगठन के खोले कई राज़

BY: Yoganand Shrivastva

बोकारो, झारखंड: झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे सघन अभियान के दौरान 22 वर्षीय महिला माओवादी सुनिता मुर्मू ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। सुनिता ने स्वीकार किया कि माओवादी संगठन से जुड़ना उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। उसने अपने अनुभव साझा करते हुए संगठन के भीतर के कई राज भी उजागर किए हैं।

लूगु पहाड़ में हुआ था बड़ा मुठभेड़ ऑपरेशन

21 अप्रैल को बोकारो जिले के लूगु पहाड़ इलाके में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच एक भीषण मुठभेड़ हुई थी। इस कार्रवाई में माओवादी नेता प्रयाग मांझी उर्फ विवेक समेत आठ उग्रवादी मारे गए थे। इस ऑपरेशन को “डाकाबेड़ा” नाम दिया गया था और यह झारखंड पुलिस, कोबरा 209, सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर और बोकारो पुलिस की संयुक्त कार्रवाई थी। मुठभेड़ के बाद बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी।

जंगल से भागकर की आत्मसमर्पण की राह

उक्त मुठभेड़ के दौरान सुनिता मुर्मू, जो माओवादी दस्ते का हिस्सा थी, किसी तरह जान बचाकर जंगल की ओर भाग गई थी। संगठन के वरिष्ठ नेताओं की मौत और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर, उसने 28 अप्रैल को बोकारो में पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।

तीन साल रह चुकी है जेल में

सुनिता, जो दुमका जिले के अमरपानी गांव की निवासी है, पर पहले भी गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह तीन साल तक गिरिडीह जेल में न्यायिक हिरासत में रही है। उस पर महुआटांड और खुखरा थाना क्षेत्रों में आर्म्स एक्ट, विस्फोटक अधिनियम और यूएपीए जैसी धाराओं के तहत कई मुकदमे चल रहे हैं।

संगठन में धोखे से हुई भर्ती

मीडिया से बातचीत में सुनिता ने बताया कि माओवादी उसे कोर्ट ले जाने के बहाने पहाड़ की ओर ले गए थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसे माओवादी दस्ते में जबरन शामिल कर लिया गया। लूगु पहाड़ क्षेत्र में डटे दस्ते में कुछ समय बिताने के बाद ही उसे यह महसूस हो गया कि वह एक खतरनाक राह पर चल पड़ी है।

मुठभेड़ के बाद वह जंगलों में भटकती रही और बाद में ट्रेन के जरिये किसी तरह बोकारो पहुंची, जहां उसने आत्मसमर्पण करने का फैसला लिया।

पुलिस ने बताया अहम कामयाबी

झारखंड पुलिस ने सुनिता के आत्मसमर्पण को नक्सल उन्मूलन अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया है। पुलिस का कहना है कि इस आत्मसमर्पण से माओवादी नेटवर्क को अंदर से समझने और कमजोर करने में मदद मिलेगी।

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