रेत की चोरी से प्रशासन बेखबर
कोरबा, छत्तीसगढ़ – कोरबा जिले के ग्राम सोनपुरी से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां हसदेव नदी से लगातार बिना रॉयल्टी के रेत की तस्करी की जा रही है। रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे दिन-रात खुलेआम 10 से 15 ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत का अवैध परिवहन कर रहे हैं, और प्रशासन की नजर से बचते हुए यह गैरकानूनी कार्य जारी है।
सोनपुरी घाट, जो हसदेव नदी से सटा हुआ इलाका है, वहां रेत चोरों की सक्रियता ने न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह गंभीर चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रेत चोरी का यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
रेत माफिया बिना किसी डर के ट्रैक्टरों में रेत भरकर ले जा रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि या तो उन्हें राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है या फिर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुका है।
पर्यावरण और राजस्व दोनों को नुकसान:
इस प्रकार की अवैध गतिविधियों से जहां एक ओर सरकार को राजस्व की भारी हानि हो रही है, वहीं दूसरी ओर नदी की पारिस्थितिकी और पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अवैध खनन से नदी की गहराई बढ़ती जा रही है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
जनता की मांग:
ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस अवैध रेत परिवहन पर तुरंत रोक लगाई जाए, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही घाट क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या संज्ञान लेता है और रेत माफियाओं के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।





