तमिलनाडु में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (PM-SHRI) योजना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हाल ही में बीजेपी नेता और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने डीएमके (DMK) सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि तमिलनाडु सरकार पहले PM-SHRI योजना में शामिल होने के लिए तैयार थी, लेकिन अब राजनीतिक कारणों से अपना रुख बदल रही है।
क्या विजय की राजनीतिक एंट्री वजह है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुपरस्टार विजय की राजनीति में एंट्री के बाद DMK और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने अपने रुख को और सख्त कर लिया है।
विजय की पार्टी “तमिलागा वितुथई मक्कल काची” (TVMK) शिक्षा और सामाजिक न्याय को प्रमुख मुद्दा बना रही है।
DMK को डर है कि विजय की बढ़ती लोकप्रियता उसे युवा और शिक्षित मतदाताओं से दूर कर सकती है।
इसी कारण DMK अब NEP और PM-SHRI पर केंद्र के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रही है।
धर्मेंद्र प्रधान का दावा
धर्मेंद्र प्रधान ने डीएमके सरकार को घेरते हुए कहा कि तमिलनाडु सरकार ने एक साल पहले ही केंद्र को पत्र लिखकर PM-SHRI योजना में शामिल होने की इच्छा जताई थी, लेकिन अब वह राजनीतिक फायदे के लिए इससे पीछे हट रही है।
तमिलनाडु सरकार का जवाब
DMK नेताओं का कहना है कि केंद्र की नीतियां राज्य के अधिकारों में दखल देती हैं और शिक्षा को केंद्रीय नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रही हैं। उनका आरोप है कि PM-SHRI के तहत हिंदी और संस्कृत को थोपने की कोशिश की जा रही है।





