मध्यप्रदेश के नीमच में वेलेंटाइन—डे की जगह एक संस्था बीते दस वर्षों से मातृ—पितृ दिवस मना रही है। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि युवा पीढी सनातन धर्म से जुडे और भारतीय संस्कृति को बढावा देवे। रविवार को वेलेंटाइन—डे की जगह मातृ—पितृ दिवस मनाया गया और हजारों युवक—युवतियों ने इस कार्यक्रम में माता—पिता के पैर छुकर उनका आशीर्वाद लिया और पूजा—अर्चना भी की गई। कार्यक्रम में बच्चों से लेकर बुजुर्गों ने भाग लिया और वेलेंटाइन—डे का बहिष्कार किया।
श्री योग वेदांत महिला सेवा समिति वेलेंटाइन्—डे का विरोध करते हुए वर्ष 2015 में मातृ—पितृ पूजन दिवस की शुरूआत की गई थी, शुरूआत में बहुत कम लोग इससे जुडे थे, लेकिन जैसे साल बीतते गए और लोगों का कारवां बढता गया। आज की स्थिति में हजारों लोग वेलेंटाइनडे न मनाते हुए इस कार्यक्रम में भाग लेते है और दिनभर एक—दूसरे के साथ रहते है और साथ में सहभोज करते है।
7 फरवरी से लेकर 14 फरवरी तक वेलेंटाइनडे सप्ताह चल रहा है, सोशल मीडिया में भी इसको लेकर चर्चाएं है, देशभर में इस दिवस का विरोध होता है, लेकिन नीमच में कुछ खास अंदाज में एक समारोह की तरह मातृ—पितृ दिवस मनाया जा रहा है। संस्था से जुडे हुए कैलाश अंदानी ने बताया कि पाश्चात संस्कृति को समाप्त करने और भारतीय संस्कृति के अनुकूल जीवन जीने के लिए संस्था ने संकल्प लिया है, जिसके परिणाम सकारात्मक सामने आए है। आज हजारों लोग वेलेंटाइनडे न मानते हुए मातृ—पितृ दिवस को मनाते है।





