BY: Yoganand Shrivastva
UP Government Job Verification Rules उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। इंडिया टीवी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के तहत नियुक्ति के दौरान अभ्यर्थियों के आचरण और गतिविधियों की जांच पर जोर दिया गया है। नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी निर्देशों में हिंसक गतिविधियों में शामिल रहने और हिंसक उद्देश्यों वाले संगठनों से जुड़ाव को नियुक्ति के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।
राजनीतिक विचारधारा नहीं, हिंसक गतिविधियों पर रहेगा ध्यान
UP Government Job Verification Rules निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जाएगा। हालांकि, ऐसे व्यक्ति जो किसी ऐसे संगठन के सदस्य हैं, जिसका घोषित उद्देश्य हिंसक तरीकों से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को बदलना है, उन्हें सरकारी नियुक्ति के लिए अपात्र माना जा सकता है।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद और सत्यापन की तारीख से पिछले तीन वर्षों के भीतर ऐसी गतिविधियों में भाग लेना इस बात का प्रमाण माना जा सकता है कि संबंधित व्यक्ति अब भी उनमें सक्रिय है। हालांकि, इस अवधि के दौरान उसकी प्रवृत्ति में बदलाव के ठोस और सकारात्मक प्रमाण उपलब्ध होने पर स्थिति का अलग आकलन किया जा सकता है।
केवल एफआईआर दर्ज होने से अभ्यर्थी नहीं होगा अयोग्य
UP Government Job Verification Rules चरित्र सत्यापन के नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ केवल प्राथमिकी दर्ज होने या जांच लंबित रहने से उसे स्वतः सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा। यानी किसी मामले में नाम आने और दोषसिद्धि या अन्य प्रासंगिक तथ्यों के आधार पर पात्रता तय करने के बीच अंतर रखा जाएगा।
निर्देशों के मुताबिक, पुलिस को चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी। आवश्यकता पड़ने पर अभ्यर्थी के पिछले विभाग से भी उसके आचरण और सेवा संबंधी जानकारी ली जा सकती है।
पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा सत्यापन
UP Government Job Verification Rules रिपोर्ट के अनुसार, नए निर्देशों के तहत पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का इस प्रक्रिया के अंतर्गत दोबारा सत्यापन नहीं किया जाएगा। व्यवस्था का उद्देश्य सीधी भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों के चरित्र और आचरण से संबंधित जानकारी की जांच करना है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि किसी भी प्रदर्शन में शामिल होने मात्र से हर अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, राजनीतिक विचारधारा के आधार पर अयोग्यता नहीं होगी और केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से भी अभ्यर्थी स्वतः बाहर नहीं होगा। नियुक्ति के मामले में गतिविधियों की प्रकृति और संबंधित नियमों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।


