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Delhi Opposition Rally : दिल्ली में विपक्ष की रैली पर सियासी बवाल, तारीख पर बीजेपी और कारोबारियों का सवाल

Delhi Opposition Rally 1nov vote controversy

Delhi Opposition Rally : 1 नवंबर को दिल्ली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, बीजेपी का भी जवाबी अभियान, कारोबारियों को टेंशन

रिपोर्ट- प्रमोद श्रीवास्तव

Delhi Opposition Rally : नई दिल्ली, देश की सियासत में एक बार फिर वोट और लोकतंत्र के मुद्दे पर टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली करने जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों और कथित वोट चोरी के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है।

Delhi Opposition Rally: दिल्ली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, 1 नवंबर की तारीख पर सियासी संग्राम

विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर रोक लगाने की मांग भी उठाई है। वहीं, बीजेपी विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते हुए SIR के समर्थन में अभियान चला रही है। अभियान का नाम दिया गया है, अराजकता मिटाओ-लोकतंत्र बचाओ। लेकिन इस सबमें एक और एंगल है एंगल ये कि एक नवंबर…ये वही तारीख है, जिस पर 1984 की सिख विरोधी हिंसा की यादें जुड़ी हैं। इंडिया गठबंधन की रैली पर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं।कांग्रेस को सिख समुदाय की भावनाओं और उस त्रासदी में अपनों को खोने वाले परिवारों के दर्द का ध्यान रखना चाहिए।

Delhi Opposition Rally: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR की लड़ाई, तारीख और सिख विरोधी हिंसा पर गरमाई

नवंबर… दिल्ली का रामलीला मैदान… और विपक्ष का बड़ा सियासी जमावड़ा। ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ कांग्रेस और INDIA गठबंधन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महारैली में शामिल होने की अपील की है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे विपक्षी एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में भी देख रहा है।

Delhi Opposition Rally: 1 नवंबर को दिल्ली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, तारीख पर विपक्ष के सवाल, कारोबारियों को टेंशन

दरअसल विवाद की जड़ है मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR… विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने और सूची में अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। विपक्ष मतदाता सूची में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार की सुरक्षा का मुद्दा उठा रहा है।

उधर विपक्ष की महारैली के बीच बीजेपी भी जवाबी रणनीति के साथ मैदान में उतरी हुई है। पार्टी SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों का विरोध कर रही है और ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ के संदेश के साथ पदयात्राओं की तैयारी है। बीजेपी का आरोप ये भी है कि 1984 में इसी तारीख के आसपास दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा हुई थी। पार्टी ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय की भावनाओं के प्रति संवेदनहीनता का आरोप लगाया है।

इस राजनीतिक टकराव के बीच दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने भी चिंता जताई है। कारोबारियों को आशंका है कि बड़ी रैली और उससे जुड़े यातायात प्रतिबंधों के कारण त्योहारों के दौरान व्यापार प्रभावित हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस ने कारोबारियों की चिंताओं के बावजूद 1 नवंबर को रैली आयोजित करने का फैसला बरकरार रखा है।

Delhi Opposition Rally: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया पर रोक की मांग, लोकतंत्र का सवाल, सरकार-विपक्ष के अपने अभियान

बहरहाल अब निगाहें 1 नवंबर की विपक्ष की महारैली पर हैं। विपक्ष कितनी बड़ी संख्या में लोगों को जुटा पाता है, गठबंधन के कितने प्रमुख नेता मंच साझा करते हैं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर सरकार व चुनाव आयोग की ओर से क्या जवाब आता है।क्योंकि लोकतंत्र में आरोपों की जांच, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और हर पात्र नागरिक के मतदान अधिकार की सुरक्षा अहम सवाल हैं।

सवाल ये भी कि क्या कांग्रेस को रैली की तारीख बदलनी चाहिए ? क्या 1984 की त्रासदी को लेकर बीजेपी का सवाल कांग्रेस के लिए नई राजनीतिक चुनौती बनेगा? और क्या वोट चोरी के मुद्दे पर होने वाली महारैली अब 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर भी सियासी बहस का केंद्र बनेगी ?….

• दिल्ली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन — रामलीला मैदान में 1 नवंबर को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली का आयोजन।
• कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन — विपक्षी दलों की एकजुटता दिखाने की कोशिश।
• वोट चोरी का मुद्दा केंद्र में — विपक्ष ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए।
• मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध।

• चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस — आयोग की भूमिका और जवाबदेही को लेकर राजनीतिक टकराव।
• सरकार और विपक्ष आमने-सामने — आरोपों और जवाबी बयानों से राजनीतिक बहस तेज।
• लोकतंत्र और मताधिकार का सवाल — विपक्ष अपने अभियान को मताधिकार की सुरक्षा से जोड़ रहा है।

• महारैली के सियासी मायने — विपक्षी एकता और साझा रणनीति का प्रदर्शन करने का मंच।
• सत्ता पक्ष के सामने चुनौती — विपक्ष के आरोपों पर जवाब और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसे को लेकर बहस।
• सबसे बड़ा सवाल — क्या यह महारैली चुनाव सुधार की बहस को आगे बढ़ाएगी या सियासी आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित


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