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भारत पहुंचे लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलॉइस, PM Modi और एस. जयशंकर से करेंगे मुलाकात

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PM Modi: यूरोप का बेहद छोटा देश लिकटेंस्टीन इन दिनों भारत के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को लेकर चर्चा में है। यहां के प्रिंस एलॉइस चार दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात प्रस्तावित है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रिंस एलॉइस के साथ उनकी पत्नी प्रिंसेस सोफी और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का एक दल भी भारत आया है। इस दौरे से भारत और लिकटेंस्टीन के बीच आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की उम्मीद है। खास बात यह है कि आकार और आबादी में बेहद छोटा होने के बावजूद लिकटेंस्टीन दुनिया के समृद्ध देशों में गिना जाता है। यहां न तो कोई बड़ा एयरपोर्ट है और न ही इसकी अपनी अलग मुद्रा है, फिर भी इसकी अर्थव्यवस्था काफी मजबूत मानी जाती है।

PM Modi: लिकटेंस्टीन इतना खास क्यों है?

लिकटेंस्टीन मध्य यूरोप में आल्प्स पर्वतमाला के बीच स्थित एक छोटा-सा देश है। इसकी सीमा स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया से लगती है, जबकि इसकी राजधानी वाडुज़ है। सीमित क्षेत्रफल और लगभग 40 हजार की आबादी वाला यह देश अपनी समृद्ध अर्थव्यवस्था, औद्योगिक गतिविधियों और ऊंचे जीवन स्तर के लिए जाना जाता है।

वर्ल्ड एटलस के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में लिकटेंस्टीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी, क्रय शक्ति समता यानी पीपीपी के आधार पर, लगभग 1,95,372 अमेरिकी डॉलर बताई गई। हालांकि, प्रति व्यक्ति जीडीपी के अलग-अलग आंकड़े गणना की पद्धति और इस्तेमाल किए गए स्रोत के अनुसार बदल सकते हैं। इस देश की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए इसकी औद्योगिक क्षमता, वित्तीय सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भूमिका को भी देखना जरूरी है।

PM Modi: अपनी मुद्रा नहीं, स्विस फ्रैंक से चलता है काम

लिकटेंस्टीन की एक खास बात यह है कि यहां अपनी अलग राष्ट्रीय मुद्रा नहीं है। देश में स्विस फ्रैंक का इस्तेमाल किया जाता है। स्विस फ्रैंक स्विट्जरलैंड की आधिकारिक मुद्रा है और इसे स्विस नेशनल बैंक जारी करता है।

लिकटेंस्टीन और स्विट्जरलैंड के बीच सीमा शुल्क तथा मौद्रिक व्यवस्था को लेकर विशेष समझौते हैं। इसी व्यवस्था के कारण लिकटेंस्टीन को अपनी अलग मुद्रा जारी करने की जरूरत नहीं पड़ती। स्विट्जरलैंड के साथ आर्थिक संबंध होने के बावजूद लिकटेंस्टीन एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है।

PM Modi: 1719 से स्वतंत्र राज्य के रूप में मौजूद है लिकटेंस्टीन

लिकटेंस्टीन का इतिहास काफी पुराना है। अमेरिकी विदेश विभाग की ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार, लिकटेंस्टीन राजपरिवार ने 1699 और 1713 में क्रमशः शेलनबर्ग और वाडुज़ के क्षेत्रों का अधिग्रहण किया था। वर्ष 1719 में इन क्षेत्रों को मिलाकर पवित्र रोमन साम्राज्य के अंतर्गत लिकटेंस्टीन नाम की रियासत बनाई गई।

नेपोलियन के दौर में इस क्षेत्र पर फ्रांसीसी प्रभाव रहा, लेकिन 1815 में लिकटेंस्टीन को जर्मन परिसंघ का हिस्सा बनाया गया। बाद में 1866 में जर्मन परिसंघ के विघटन के बाद देश ने अपनी स्वतंत्र स्थिति बनाए रखी। वर्ष 1868 में लिकटेंस्टीन ने अपनी छोटी सेना को समाप्त कर दिया। इसके बाद से देश की पहचान सैन्य तटस्थता और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संबंधों से भी जुड़ी रही है।

PM Modi: न एयरपोर्ट, न समुद्री बंदरगाह, फिर भी दुनिया से जुड़ा है देश

लिकटेंस्टीन की भौगोलिक स्थिति इसे दूसरे देशों से अलग बनाती है। यह एक स्थलरुद्ध देश है, यानी इसकी कोई समुद्री सीमा नहीं है। यहां कोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी नहीं है। देश आने वाले यात्री आमतौर पर स्विट्जरलैंड या ऑस्ट्रिया के हवाई अड्डों पर उतरते हैं और वहां से सड़क या रेल मार्ग के जरिए लिकटेंस्टीन पहुंचते हैं।

देश के बाल्ज़र्स इलाके में हेलीकॉप्टर उतरने की सुविधा मौजूद है। इसके अलावा बस, ट्रेन और कार से भी यहां यात्रा की जा सकती है। छोटे आकार के बावजूद सड़क और रेल संपर्क इसे पड़ोसी देशों तथा यूरोप के दूसरे हिस्सों से जोड़ते हैं।

PM Modi: लिकटेंस्टीन में किस तरह की शासन व्यवस्था है?

लिकटेंस्टीन में वंशानुगत संवैधानिक राजतंत्र है। यहां प्रिंस देश के राष्ट्राध्यक्ष होते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। शासन व्यवस्था में प्रिंस के साथ निर्वाचित संसद और सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

देश की सरकार एक सामूहिक निकाय के रूप में काम करती है, जिसमें सरकार के प्रमुख और चार सरकारी पार्षद शामिल होते हैं। इनकी नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होती है। देश में कानून बनाने की प्रक्रिया में संसद की अहम भूमिका रहती है, जबकि प्रिंस को भी संवैधानिक प्रावधानों के तहत कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं।

इन अधिकारों में कानूनों को स्वीकृति देना, कुछ परिस्थितियों में वीटो का इस्तेमाल करना और शाही आदेश जारी करना शामिल है। आपातकालीन परिस्थितियों में भी विशेष संवैधानिक प्रावधान लागू हो सकते हैं। इस तरह लिकटेंस्टीन की शासन व्यवस्था में राजशाही और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच अधिकारों का एक निर्धारित ढांचा है।

PM Modi: भारत यात्रा पर क्यों आए हैं प्रिंस एलॉइस?

प्रिंस एलॉइस की चार दिवसीय भारत यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात होनी है। उनके साथ प्रिंसेस सोफी और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का दल भी आया है।

यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी के नए अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है। उद्योगपतियों की मौजूदगी से कारोबारी संपर्क बढ़ाने और दोनों देशों की कंपनियों के बीच सहयोग की संभावनाओं को तलाशने पर भी जोर दिया जा सकता है।

विदेश मंत्रालय का मानना है कि इस यात्रा से भारत और लिकटेंस्टीन के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूती मिलेगी। साथ ही, आपसी हितों से जुड़े नए क्षेत्रों में सहयोग का रास्ता भी खुल सकता है।

PM Modi: भारत-EFTA समझौते के बाद बढ़ेगा आर्थिक सहयोग

भारत और लिकटेंस्टीन के संबंधों में यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी EFTA के साथ हुआ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता भी महत्वपूर्ण है। इस समूह में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता 2025 में लागू हुआ था।

इस समझौते का उद्देश्य व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाना तथा दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है। ऐसे में प्रिंस एलॉइस की भारत यात्रा को इस व्यापक आर्थिक साझेदारी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

भारत जैसे बड़े बाजार और लिकटेंस्टीन जैसे छोटे लेकिन आर्थिक रूप से विकसित देश के बीच सहयोग से उद्योग, तकनीक, निवेश और नवाचार के क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इस यात्रा के दौरान किसी खास समझौते या निवेश की घोषणा होती है या नहीं, यह आधिकारिक बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा।

PM Modi: छोटे देश की बड़ी अर्थव्यवस्था पर दुनिया की नजर

लिकटेंस्टीन की पहचान केवल उसकी कम आबादी या छोटे क्षेत्रफल तक सीमित नहीं है। मजबूत औद्योगिक आधार, वित्तीय सेवाओं और यूरोपीय बाजारों से जुड़ाव ने इसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बनाया है। अपनी अलग मुद्रा और एयरपोर्ट न होने के बावजूद देश ने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग के जरिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी जगह बनाई है।

प्रिंस एलॉइस की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ होने वाली मुलाकातों पर नजर रहेगी। इन बैठकों से भारत और लिकटेंस्टीन के संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है, यह स्पष्ट हो सकेगा।

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