OBC Creamy Layer : सामाजिक स्थिति और पद की प्रकृति भी अहम,केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट ने लगाई गुहार, लागू करने के लिए मांगे 2 साल
OBC Creamy Layer : सिविल सेवा परीक्षा पास करना हजारों युवाओं का सपना होता है….लेकिन 2025 की परीक्षा में सफल हुए 958 उम्मीदवारों के लिए अब नियुक्ति और ट्रेनिंग का इंतजार लंबा हो गया है..इनमें IAS, IPS और दूसरी केंद्रीय सेवाओं में जाने वाले उम्मीदवार शामिल हैं…OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के फैसले की वजह से IAS ट्रेनिंग अटकी हुई है..अगस्त के तीसरे सप्ताह से इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन सर्विस की ट्रेनिंग शुरू हो जाती है, लेकिन इस साल अक्टूबर बीतने पर भी ट्रेनिंग शुरू नहीं हो पाई है.. लेकिन ये मामला सिर्फ UPSC CSE तक सीमित नहीं रहेगा..एक्सपर्ट का कहना है कि SSC, रेलवे समेत दूसरी भर्तियों में भी OBC क्रीमी लेयर का नया आरक्षण लागू होगा.. तो वहीं IIT, IIM, CUET समेत दूसरे एडमिशन प्रोसेस पर भी इसका असर दिखाई देगा..केंद्र ने इस फैसले को लागू करने के तरीके पर अदालत से स्पष्टीकरण मांगा है। फिलहाल सर्विस अलॉटमेंट और फाउंडेशन कोर्स की प्रक्रिया अटकी हुई है…सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को अपने फैसले में कहा कि OBC उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में रखने का फैसला सिर्फ माता-पिता की आमदनी के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए उनकी नौकरी की प्रकृति, पद के स्तर और लागू नियमों को भी देखना होगा…इस पूरे मामले में पहले UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट आया और 958 उम्मीदवार सफल हुए…इसके बाद 11 मार्च 2026 के फैसले ने OBC क्रीमी लेयर तय करने के तरीके पर कानूनी स्थिति स्पष्ट की.. अब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा है कि इस फैसले को किस तरह लागू किया जाए और क्या इसका असर पहले लिए गए फैसलों पर भी पड़ेगा..इसी स्पष्टीकरण का इंतजार सर्विस अलॉटमेंट की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है.. जब तक उम्मीदवारों की सेवा तय नहीं होती, उनके प्रशिक्षण की आगे की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है.. इस वजह से नए चयनित उम्मीदवारों को IAS, IPS, IRS या दूसरी केंद्रीय सेवाओं में जाने के बाद की औपचारिकताओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है..
OBC Creamy Layer : UPSC में चयन के बाद उम्मीदवारों को उनकी रैंक, पसंद और लागू नियमों के आधार पर अलग-अलग सेवाएं मिलती हैं..इसके बाद उन्हें फाउंडेशन कोर्स करना होता है…यह ट्रेनिंग मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी या उससे जुड़ी संस्थाओं में होती है..इस दौरान नए अधिकारियों को संविधान, सरकारी कामकाज, प्रशासन और पब्लिक पॉलिसी की बुनियादी जानकारी दी जाती है…यह कोर्स अलग-अलग सेवाओं में जाने वाले अधिकारियों को प्रशासनिक काम के लिए तैयार करने की शुरुआती प्रक्रिया है…सिविल सेवा में वरिष्ठता की गणना फाउंडेशन कोर्स शुरू होने से जुड़ी होती है.. ऐसे में देरी से जॉइनिंग शेड्यूल और करियर की आगे की टाइमलाइन पर भी असर पड़ने की आशंका है.. हालांकि इसका वास्तविक असर लागू नियमों और अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा.. इस विवाद का असर सिर्फ 2025 में चुने गए उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है…जिसमें करीब 100 ऐसे उम्मीदवारों का भी जिक्र है, जिन्होंने पिछले वर्षों में UPSC परीक्षा पास की थी, लेकिन उनकी OBC आरक्षण की मांग खारिज कर दी गई थी..उन्हें क्रीमी लेयर में रखा गया था..केंद्र सरकार ने अदालत के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं।
OBC Creamy Layer : पहले पूरे हो चुके दाखिलों, दी गई डिग्रियों और अन्य तय अधिकारों को नए फैसले के चलते अपने आप दोबारा न खोला जाए…दूसरी, सरकार को नियम लागू करने की तैयारी के लिए दो साल का समय दिया जाए.. सरकार को यह तय करने के लिए भी समय चाहिए कि प्राइवेट कंपनियों, PSU और दूसरे संस्थानों में कौन-से पद सरकारी सेवाओं के पदों के बराबर माने जा सकते हैं..यही तुलना क्रीमी लेयर के फैसले में अहम हो सकती है..अब जब क्रीमी लेयर तय करने के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट की नई व्याख्या सामने आई है, तो इन पुराने मामलों पर भी सवाल उठ रहे हैं..यह स्पष्ट होना बाकी है कि नए फैसले का उन उम्मीदवारों पर क्या असर होगा और क्या उनके मामलों की दोबारा जांच की जा सकती है..बताया जा कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को सरकार की मांग पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था..


