रिपोर्ट- हिमांशु पटेल
Farmers Protest : रायपुर, छत्तीसगढ़ में धान और किसानों के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर भारतीय किसान संघ ने 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। किसानों ने 1700 करोड़ रुपए के बकाया भुगतान और 3358 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की मांग की है। वहीं, कांग्रेस ने भी किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने दिवाली से पहले धान खरीदी और अग्रिम भुगतान की मांग की। दूसरी ओर, मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किसानों के हित में मांगों पर विचार करने की बात कही।
Farmers Protest : धान का बकाया भुगतान, 3358 पर खरीदी की मांग
भारतीय किसान संघ ने नवा रायपुर में अन्नदाता गर्जना रैली के जरिए राजधानी के नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन किया। किसानों की मांग है कि वर्ष 2022-23 का 1700 करोड़ रुपए बकाया तत्काल दिया जाए और 3358 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी हो। इसके अलावा, 15 नवंबर से 15 फरवरी तक खरीदी, टोकन व्यवस्था में सुधार और अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने की मांग भी उठाई गई।
Farmers Protest : धान, किसानों के मुद्दे पर प्रदेश में सियासी घमासान
कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने धान खरीदी 3250 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने, दिवाली से पहले खरीदी शुरू करने और किसानों को अग्रिम भुगतान देने की मांग की। उन्होंने भारतीय किसान संघ को RSS का अनुसांगिक संगठन बताते हुए कहा कि उसे आंदोलन के बजाय सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।
Farmers Protest : धान किसानों की मांगों पर आमने-सामने सरकार-विपक्ष
वहीं, किसान संघ के प्रदर्शन पर कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में उठने वाले मुद्दों पर चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने गन्ना किसानों के हित में काम किया है और किसानों के हित में सरकार जो भी कर सकती है, उन बातों पर विचार किया जाएगा।
Farmers Protest : बहरहाल, छत्तीसगढ़ की राजनीति में धान खरीदी हमेशा बड़ा मुद्दा रही है। इस बार भारतीय किसान संघ की मांगें, कांग्रेस का हमला और सरकार का जवाब एक साथ सामने हैं। एक तरफ किसान बकाया भुगतान, समर्थन मूल्य और खेती से जुड़ी सुविधाओं पर ठोस निर्णय चाहते हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे सरकार को घेरने के मौके के तौर पर देख रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या किसानों की मांगों पर जल्द फैसला होगा? क्या बकाया भुगतान और समर्थन मूल्य को लेकर सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी? या फिर धान और किसानों के मुद्दे पर प्रदेश में सियासी घमासान और तेज होगा ?
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