BY: Yoganand Shrivastva
Success Story उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले उत्तम कुमार तिवारी की कहानी दृढ़ संकल्प, अटूट हौसले और लगातार संघर्ष की एक मिसाल है। बीटेक की पढ़ाई के बाद महज 10,000 रुपये की नौकरी करने और जीवन में 13 बार असफलता का मुंह देखने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने यूपी पीसीएस 2021 की परीक्षा में 24वीं रैंक हासिल कर एसडीएम (SDM) पद का सफर तय किया।
सीमित संसाधन और अंग्रेजी की चुनौती से संघर्ष
Success Story उत्तम कुमार तिवारी का बचपन बेहद संघर्षों के बीच बीता। उनके पिता सिविल कोर्ट में क्लर्क थे और परिवार में तीन बहनें व दो भाई थे। पिता का सपना था कि बेटा आईआईटी (IIT) से इंजीनियरिंग करे, जिसके लिए उन्होंने अपनी जमा-पूंजी से 42,000 रुपये जुटाकर कोचिंग की व्यवस्था की थी। हालांकि, हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के कारण उत्तम के सामने अंग्रेजी एक बहुत बड़ी बाधा बन गई, जिससे आईआईटी का उनका सपना अधूरा रह गया। इसके बावजूद उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं टूटने दी और आगे बढ़ते रहे।
ताने और 13 बार असफलता के बावजूद नहीं मानी हार
Success Story इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्हें शुरुआती दौर में मात्र 10,000 रुपये महीने की नौकरी करनी पड़ी, तो समाज के ताने भी सुनने पड़े। इसके अलावा सिविल सेवा और अन्य परीक्षाओं (जैसे यूपीएससी, पीसीएस और एसएसबी इंटरव्यू) में लगातार 13 बार असफलता का सामना करना पड़ा। किसी भी इंसान का हौसला तोड़ने के लिए यह स्थिति काफी थी, लेकिन उत्तम ने अपनी कमजोरियों को ताकत बनाया और अपनी रणनीति में सुधार किया।
असफलता को पीछे छोड़ बने एसडीएम
Success Story बार-बार असफलता मिलने के बावजूद उत्तम ने खुद पर भरोसा बनाए रखा और अपनी पढ़ाई की दिशा को मजबूत किया। आखिरकार उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्होंने यूपी पीसीएस 2021 की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 24वीं रैंक हासिल की। वर्तमान में वह जालौन जिले की उरई (सदर) तहसील में एसडीएम के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और साबित कर दिया है कि पक्के इरादों के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है।


