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7 October 2026 Panchang : नवरात्रि की सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

7 October 2026 Panchang

by: vijay yadav

7 October 2026 Panchang : शनिवार, शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन है। मां कालरात्रि की आराधना के साथ जानिए सप्तमी तिथि, रवि योग, सूर्य गोचर, अभिजित मुहूर्त और प्रमुख शहरों में राहुकाल का समय।

17 अक्टूबर 2026, शनिवार को शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी मनाई जाएगी। नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय और नकारात्मकता से मुक्ति पाने का साहस प्रदान करती हैं। इस दिन श्रद्धालु पूजा-पाठ, मंत्र जाप और सेवा के माध्यम से माता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

पंचांग के अनुसार, इस दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। सुबह रवि योग का संयोग बनेगा, जबकि शाम को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करने का उल्लेख है। आइए जानते हैं 17 अक्टूबर का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और नवरात्रि की सप्तमी का धार्मिक महत्व।

7 October 2026 Panchang : 17 अक्टूबर 2026 का पंचांग

दिन: शनिवार

मास: आश्विन

पक्ष: शुक्ल पक्ष

तिथि: सप्तमी, रविवार सुबह 8:29 बजे तक

नक्षत्र: मूल सुबह 9:47 बजे तक, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा

योग: रवि योग सुबह 9:04 बजे तक

सूर्य गोचर: शाम 7:50 बजे तुला राशि में प्रवेश, दिए गए पंचांग के अनुसार

पर्व एवं विशेष: शारदीय नवरात्रि सप्तमी, मां कालरात्रि पूजा

7 October 2026 Panchang : 17 अक्टूबर के शुभ मुहूर्त

धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और दिन की योजना बनाने के लिए दिए गए पंचांग में ये समय बताए गए हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:55 से 5:44 बजे तक

प्रातः संध्या: सुबह 5:19 से 6:33 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:47 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:14 से 6:39 बजे तक

सायाह्न संध्या: शाम 6:14 से 7:28 बजे तक

शुभ मुहूर्त का उपयोग परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार करें। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय मंदिर या पंचांग विशेषज्ञ से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

7 October 2026 Panchang : 17 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय

ज्योतिषीय परंपरा में राहुकाल को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए सामान्यतः टालने की सलाह दी जाती है। प्रमुख शहरों के लिए दिए गए समय इस प्रकार हैं:

दिल्ली: सुबह 9:15 से 10:41 बजे तक

मुंबई: सुबह 9:29 से 10:56 बजे तक

चंडीगढ़: सुबह 9:17 से 10:43 बजे तक

लखनऊ: सुबह 8:59 से 10:26 बजे तक

भोपाल: सुबह 9:12 से 10:39 बजे तक

कोलकाता: सुबह 8:28 से 9:55 बजे तक

अहमदाबाद: सुबह 9:31 से 10:58 बजे तक

चेन्नई: सुबह 8:57 से 10:26 बजे तक

ध्यान दें कि राहुकाल का समय शहर के सूर्योदय और स्थानीय गणना के अनुसार बदलता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय: सुबह 6:22 बजे

सूर्यास्त: शाम 5:49 बजे

ये समय दिए गए पंचांग के अनुसार हैं। अपने शहर के लिए सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर होगा।

7 October 2026 Panchang : नवरात्रि की सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा का महत्व

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना की जाती है। मां का स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में उन्हें शुभ फल देने वाली और भक्तों के भय को दूर करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।

पौराणिक परंपरा के अनुसार, मां कालरात्रि दुष्ट शक्तियों के विनाश और धर्म की रक्षा का प्रतीक हैं। उनकी पूजा करते समय भक्त साहस, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति की कामना करते हैं।

इस दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके मां दुर्गा और मां कालरात्रि का स्मरण किया जा सकता है। पूजा में दीपक जलाएं, पुष्प अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप करें। मां के प्रति आस्था के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना और दूसरों के प्रति करुणा रखना भी आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

7 October 2026 Panchang : सूर्य का तुला राशि में गोचर: क्या है धार्मिक मान्यता?

दिए गए पंचांग के अनुसार, 17 अक्टूबर की शाम सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेंगे। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा, नेतृत्व और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन को ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना माना जाता है।

हालांकि, गोचर के प्रभावों को लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय व्याख्याएं हो सकती हैं। किसी भी राशि के लिए निश्चित लाभ या नुकसान का दावा करने के बजाय इसे पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता के रूप में देखना चाहिए।

नवरात्रि के इस पावन दिन मां कालरात्रि की आराधना के साथ संयम, साहस और सकारात्मक कर्म का संकल्प लें। श्रद्धा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करना और जरूरतमंदों की मदद करना ही पर्व की भावना को जीवन में उतारने का सार है।

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