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Iran ने अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन पर किया कब्जा, जॉर्डन के अमेरिकी बेस पर दागी 20 बैलिस्टिक मिसाइलें

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Iran : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक बड़ा दावा किया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुताबिक, उसकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के पास एक अमेरिकी मानवरहित अंडरवॉटर ड्रोन को अपने कब्जे में ले लिया है।

ईरानी पक्ष ने इस उपकरण को अमेरिकी सेना की अत्याधुनिक तकनीक से लैस मशीन बताया है। ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के दावे कर रहे हैं।

Iran : जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमले का दावा

इसी बीच ईरान ने बुधवार को जॉर्डन में मौजूद एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का भी दावा किया है। ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन के अल-अजराक क्षेत्र स्थित अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइलें दागीं।

ईरान ने इस हमले को अपने विरोधियों के खिलाफ की गई जवाबी कार्रवाई बताया है। हालांकि, इस हमले को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है। जॉर्डन की सेना का कहना है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने आने वाली मिसाइलों का पता लगाया और उनमें से ज्यादातर को हवा में ही नष्ट कर दिया।

Iran : जॉर्डन ने 20 बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने की बात कही

जॉर्डन के आधिकारिक बयान के मुताबिक, उसके रक्षा तंत्र ने कुल 20 बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक किया। सेना के अनुसार, इनमें से 18 मिसाइलों को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया गया।

जॉर्डन की सेना ने बताया कि बाकी दो मिसाइलें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खुले और खाली इलाके में जाकर गिरीं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मिसाइल हमले से बड़े स्तर पर जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव को और गंभीर बना दिया है। ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का दावा और अमेरिका की ओर से ईरानी समुद्री ठिकानों तथा तेल परिवहन से जुड़े जहाजों पर कार्रवाई के दावे अब टकराव के एक नए चरण की ओर इशारा कर रहे हैं।

Iran : अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का जवाबी कदम

ईरान की ओर से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमले का दावा अमेरिका की उस कार्रवाई के बाद सामने आया है, जिसमें अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े तेल टैंकरों को निशाना बनाया था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेना ने मंगलवार 8 सितंबर को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े पांच ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की थी। अमेरिका का कहना था कि ये जहाज ईरानी सैन्य गतिविधियों से जुड़े थे।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इनमें चार कच्चा तेल ले जाने वाले टैंकर ओमान की खाड़ी में मौजूद थे। पांचवें जहाज को फारस की खाड़ी में खार्ग द्वीप के आसपास निशाना बनाए जाने की बात कही गई।

Iran : अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर मिसाइल हमलों का भी जिक्र

अमेरिका ने ईरानी टैंकरों के खिलाफ की गई कार्रवाई को एक अलग सैन्य घटनाक्रम से जोड़कर देखा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इससे पहले के करीब 48 घंटों में ईरान की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को लगातार मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की गई थी।

अमेरिका का दावा है कि ईरानी हमलों के जवाब में ही तेल टैंकरों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की गई। इस घटनाक्रम के बाद ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया गया है, जिससे दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाई का सिलसिला और तेज होने की आशंका बढ़ गई है।

Iran : मार्को रुबियो ने ईरान को दी थी कड़ी चेतावनी

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ईरान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है। कोलंबिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान बैरनक्विला में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि ईरान अगर अमेरिकी नौसेना के जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश करता है तो अमेरिका इसका जवाब देगा।

रुबियो के बयान का संकेत साफ था कि अमेरिका ईरानी सैन्य गतिविधियों के जवाब में आगे भी कार्रवाई कर सकता है। उनके मुताबिक, अमेरिकी नौसेना को निशाना बनाने की कोशिशों के बाद ईरान से जुड़े तेल टैंकरों पर कार्रवाई की जाएगी।

इस बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी इस पूरे विवाद का अहम हिस्सा बन गई हैं।

Iran : ईरान ने अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन की पहचान बताई

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पकड़े गए ड्रोन को लेकर ईरानी राज्य मीडिया ने दावा किया है कि यह एक अत्याधुनिक मानवरहित अंडरवॉटर वाहन है। ईरानी मीडिया रिपोर्टों में इसकी पहचान ‘डाइव-एलडी’ के तौर पर की गई है।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना का कहना है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश क्षेत्र में अमेरिकी सेना की आधुनिक मानवरहित पनडुब्बी जैसी मशीन को अपने नियंत्रण में लिया। ईरानी पक्ष ने इसे नई तकनीक से लैस और खुफिया तथा निगरानी गतिविधियों के लिए उपयोगी उपकरण बताया है।

हालांकि, इस पूरे दावे की तस्वीर अमेरिका की ओर से दिए गए बयान से अलग है।

Iran : डाइव-एलडी किस तरह का अंडरवॉटर वाहन है

ईरानी रिपोर्टों में जिस डाइव-एलडी का उल्लेख किया गया है, उसे एक बड़े स्वायत्त अंडरवॉटर वाहन के रूप में बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह करीब 19 फीट लंबा वाहन है और इसे समुद्र के भीतर अलग-अलग तरह के अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

ऐसे अंडरवॉटर वाहनों का इस्तेमाल समुद्र की तलहटी का सर्वेक्षण करने, पानी के भीतर मौजूद वस्तुओं की पहचान करने और समुद्री क्षेत्र की निगरानी जैसे कार्यों के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा समुद्री बारूदी सुरंगों की पहचान और उन्हें हटाने से जुड़े अभियानों में भी इस तरह की तकनीक उपयोगी हो सकती है।

समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण ढांचे, जैसे संचार केबल और पाइपलाइन की निगरानी तथा जांच भी इस प्रकार के स्वायत्त वाहनों के संभावित इस्तेमाल में शामिल हो सकती है।

Iran : पेंटागन ने ईरान के दावे पर अलग जानकारी दी

ईरान के दावे के बाद अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन की ओर से अलग जानकारी सामने आई है। पेंटागन के एक प्रवक्ता के मुताबिक, जिस अंडरवॉटर ड्रोन को लेकर ईरान ने कब्जे में लेने का दावा किया है, वह तकनीकी खराबी के कारण पहले ही काम करना बंद कर चुका था।

अमेरिकी पक्ष के अनुसार, ड्रोन क्षेत्रीय जल की निगरानी के मिशन पर था और अमेरिकी सैन्य अभियानों में सहायता कर रहा था। हालांकि, तकनीकी समस्या के चलते यह वाहन निर्धारित तरीके से काम नहीं कर पा रहा था।

पेंटागन ने यह भी कहा कि खराब हुआ ड्रोन कोई नया अत्याधुनिक मॉडल नहीं था। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुताबिक, इसमें संवेदनशील खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता नहीं थी और इसमें किसी तरह का गोपनीय सोनार या रडार सिस्टम भी मौजूद नहीं था।

Iran : ईरान-अमेरिका के बीच समुद्री मोर्चे पर बढ़ा तनाव

अमेरिकी टैंकरों पर कार्रवाई, ईरानी मिसाइल हमलों के दावे और होर्मुज के पास अंडरवॉटर ड्रोन से जुड़ा विवाद इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच तनाव अब समुद्री क्षेत्र तक काफी गहरा चुका है।

होर्मुज जलडमरूमध्य रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां होने वाली किसी भी सैन्य गतिविधि का असर केवल ईरान और अमेरिका के संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है।

फिलहाल, अमेरिकी और ईरानी पक्ष की ओर से सामने आए दावों में कई अंतर हैं। ऐसे में घटनाक्रम से जुड़ी अंतिम स्थिति स्पष्ट होने के लिए संबंधित पक्षों की आगे की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।

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