BY: Yoganand Shrivastva
Haryana Electricity Strike हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों और इंजीनियरों की तीन दिवसीय हड़ताल के कारण गुरुग्राम, नूंह और फरीदाबाद जैसे प्रमुख जिलों में हाहाकार मच गया है। पिछले 24 घंटे से अधिक समय से बिजली आपूर्ति ठप रहने के कारण लोगों को भीषण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिजली गुल होने से कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति पर भी सीधा असर पड़ा है, जिससे आम नागरिकों के रोजमर्रा के कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
निजी कंपनी को लाइसेंस और हड़ताल की मुख्य वजह
Haryana Electricity Strike कर्मचारियों के इस उग्र आंदोलन की मुख्य वजह गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का जिम्मा निजी हाथों में सौंपना है। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने 19 अक्टूबर को ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को इन दोनों जिलों में 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस दिया है। इसके तहत लगभग 8.3 लाख उपभोक्ताओं (घरेलू, कृषि, औद्योगिक और व्यावसायिक) को भविष्य में अपना बिजली सप्लायर चुनने का विकल्प मिलना है। हालांकि, बिजली कर्मचारी इसे विभाग के पूर्ण निजीकरण की शुरुआत मानकर इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं और 22 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक सांकेतिक हड़ताल पर हैं।
सरकार और कर्मचारी नेताओं के बीच बातचीत जारी
Haryana Electricity Strike संकट की इस स्थिति से निपटने के लिए हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज के प्रयासों से पंचकूला में कर्मचारी यूनियन के नेताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठक चल रही है। सरकार और प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि इस बातचीत के जरिए जल्द ही कोई ठोस समाधान निकल आएगा और हड़ताल समाप्त होने से आम जनता को बड़ी राहत मिल सकेगी।


