Chhattisgarh Visit Controversy : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का छत्तीसगढ़ दौरा और दौरे के साथ ही सियासत का पारा हाई है। एक तरफ राष्ट्रपति के बस्तर पहुंचने को आदिवासी समाज के सम्मान और क्षेत्र के लिए अहम मौका बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने राष्ट्रपति को ही मुखौटा बता दिया। बैज ने बस्तर पंडुम के आयोजन में कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए कि राष्ट्रपति के आने से आखिर बस्तर को क्या फायदा होगा। बस फिर क्या था बीजेपी ने इसे आदिवासी समाज और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान बताते हुए कांग्रेस पर हमला बोल दिया। इसी मुद्दे पर करेंगे चर्चा, पहले देखिए यह रिपोर्ट।
Chhattisgarh Visit Controversy : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा… बस्तर के लिए खास, आदिवासी समाज के लिए खास और प्रदेश की राजनीति के लिए भी खास। अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल होंगी। बस्तर में ऐतिहासिक दशहरा परंपरा के तहत आयोजित मुरिया दरबार में उनकी मौजूदगी पर भी सबकी नजरें हैं। यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि बस्तर की आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और स्थानीय लोगों की अपेक्षाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखने का अवसर मिलेगा। नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के बाद बस्तर में शांति, विकास और विश्वास की तस्वीर पेश करने की कोशिशों के बीच राष्ट्रपति का दौरा प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। लेकिन राष्ट्रपति के दौरे से जुड़ी उम्मीदों के बीच सियासत ने ऐसी एंट्री मारी कि चर्चा विकास से हटकर मुखौटा शब्द पर आ गई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने राष्ट्रपति को मुखौटा बताते हुए आरोप लगाया कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं और घोटाले होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि राष्ट्रपति को सामने रखकर आखिर किसे फायदा पहुंचाया जा रहा है।
Chhattisgarh Visit Controversy : कांग्रेस के बयान पर बीजेपी ने भी पलटवार करने में देर नहीं की… कैबिनेट मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने मुखौटा शब्द पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जनजातीय समाज से आती हैं और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर उनका पहुंचना पूरे आदिवासी समाज के लिए गौरव की बात है. जायसवाल ने दीपक बैज के बयान की निंदा करते हुए कांग्रेस पर विकास विरोधी होने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि बस्तर विकास की ओर आगे बढ़ रहा है, लेकिन कांग्रेस को इससे परेशानी हो रही है.राष्ट्रपति का बस्तर दौरा आदिवासी समाज के सम्मान, संस्कृति और विकास की उम्मीदों से जुड़ा है, लेकिन दौरे से पहले ही सियासत मुखौटा बनाम विकास विरोध की लड़ाई में उलझ गई है. कांग्रेस के आरोपों पर सरकार को जवाब देना चाहिए, तो वहीं राजनीतिक बयानबाजी में संवैधानिक पद की गरिमा का ध्यान रखना भी जरूरी है. क्योंकि साहब बस्तर को सिर्फ बड़े आयोजन और बड़े-बड़े बयान नहीं, जमीन पर विकास, पारदर्शिता और आदिवासी समाज के भरोसे की जरूरत है।
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