Amit Shah Congress 30 Years Statement : ‘जनता के बीच जाएं, चुनाव जीत कर आएं’,विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन पर सियासी क्लेश
Amit Shah Congress 30 Years Statement : देश में विरोध प्रदर्शनों का दौर… चुनाव आयोग पर सवाल… वोट चोरी के आरोप… और इन सबके बीच अमित शाह का बड़ा सियासी दावा। दावा ये कि कांग्रेस अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आएगी। आखिर शाह को इतना भरोसा क्यों है ? क्या विरोध प्रदर्शनों को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच सियासी टकराव नई दिशा ले रहा है ? अमित शाह का कहना है कि धरना-प्रदर्शन से चुनाव नहीं जीते जाते, जनता के बीच जाना पड़ता है। दूसरी तरफ, विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा रहा है। अमित शाह का बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। शाह ने इन प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के बीच जाकर उसकी समस्याएं समझनी चाहिए। वहीं विपक्ष का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। लिहाजा, यह टकराव केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया पर भरोसे और विपक्ष की रणनीति से भी जुड़ा है। ऐसे में सवाल है कि क्या देश की राजनीति में विरोध का तरीका बहस के केंद्र में है, या असली मुकाबला जनता के भरोसे को लेकर है ? क्या हैं अमित शाह के बयान के मायने, इस रिपोर्ट में।।।
Amit Shah Congress 30 Years Statement : जनता और खुद पर भरोसा या सियासी शिगूफा ? ‘शाह के बयान’ ने बढ़ाई सियासी हलचल
Amit Shah Congress 30 Years Statement : कांग्रेस अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आएगी… केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस दावे ने सियासी बहस को तेज कर दिया है। दिल्ली में यमुना पुनर्जीवन परियोजनाओं के कार्यक्रम के दौरान शाह ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की राजनीति पर सवाल उठाए। राहुल गांधी का नाम लेकर निशाना साधा, तो बिना नाम लिए प्रदर्शन और धरने की राजनीति पर भी हमला बोला। शाह ने साफ कहा कि यदि चुनाव जीतना है, तो जनता के बीच जाइए, उनकी समस्याएं समझिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन और धरने से कुछ हासिल नहीं होता। जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं समझनी होंगी, कल्याणकारी योजनाओं पर काम करना होगा। विपक्ष राजनीतिक चालबाजी और भीड़ के दम पर जनता के जनादेश को चुनौती नहीं दे सकता। कांग्रेस अपनी नकारात्मक राजनीति के कारण अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आ पाएगी।
Amit Shah Congress 30 Years Statement : इस बयान का एक सिरा हाल के उन विरोध प्रदर्शनों से भी जुड़ता है, जिनमें राहुल गांधी और विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोला था। विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बताता है, जबकि बीजेपी इन आरोपों को चुनावी हार का बहाना करार देती है। शाह ने राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग और ईवीएम पर लगाए ‘वोट चोरी’ के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जब कांग्रेस केरल या तेलंगाना जीतती है, तब चुनाव प्रक्रिया सही लगती है और हारने पर सवाल उठाए जाते हैं। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें हर छह महीने में विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ती, वे जनता के बीच रहते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ धरने, प्रदर्शन और राजनीतिक स्टंट से जनता का जनादेश नहीं बदला जा सकता, इसके लिए जमीन पर उतरना होगा।
Amit Shah Congress 30 Years Statement : तो वहीं कांग्रेस नेताओं और विपक्षी दलों ने अमित शाह के दावे को अहंकार और अति-आत्मविश्वास करार दिया। कहा कि सत्ता का घमंड जनता तोड़ती है और भाजपा सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बयान दे रही है। जिस पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का पलटवार भी है।INDIA ब्लॉक के नेताओं ने SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 6 से 13 अक्टूबर के बीच 8 बार प्रदर्शन किए। तो वहीं कॉकरोच जनता पार्टी और लेफ्ट ने भी 10 अक्टूबर को इसी मुद्दे पर प्रदर्शन बुलाया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इजाजत नहीं दी। इस बीच अमित शाह ने कांग्रेस के राजनीतिक भविष्य को लेकर किए दावे ने नई सियासी बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि विपक्ष अपने आरोपों को किस तरह आगे बढ़ाता है और बीजेपी के दावों को जनता किस नजरिए से देखती है। क्योंकि लोकतंत्र में आखिरी फैसला न नारों का होता है, न भविष्यवाणियों का, फैसला होता है मतदाता के जनादेश से। ऐसे में असली सवाल सिर्फ यह नहीं कि शाह ने क्या कहा, बल्कि यह भी है कि जनता इन दावों और जवाबों को किस तरह देखती है।।।।।।
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