Report: Pradeep bansal
Jirapur News जनपद पंचायत जीरापुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गोघटपुर में वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां न्यू बस स्टैंड पर स्वच्छता परिसर के निर्माण कार्य का शिलान्यास या काम शुरू होने से पहले ही 3 लाख 97 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि का भुगतान कर दिया गया। शासन के आधिकारिक ‘मेरी पंचायत’ पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, 29 अप्रैल को ही ‘ओम स्टील, जीरापुर’ के खाते में यह राशि ट्रांसफर कर दी गई थी। स्थानीय ग्रामीणों की लगातार शिकायतों और मीडिया में खबरें आने के बाद अब कहीं जाकर, भुगतान के करीब छह महीने बाद निर्माण कार्य शुरू किए जाने की बात सामने आ रही है।
बिना काम के भुगतान पर उठ रहे गंभीर सवाल
Jirapur News ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर जनपद पंचायत जीरापुर से लेकर जिला पंचायत राजगढ़ तक लिखित शिकायतें दर्ज कराई हैं। ग्रामीणों का मुख्य सवाल यह है कि जब मौके पर एक ईंट भी नहीं रखी गई थी और कार्य शुरू ही नहीं हुआ था, तब किस आधार पर पूरा भुगतान जारी कर दिया गया?
- क्या भुगतान से पहले सक्षम अधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था?
- क्या तकनीकी मूल्यांकन और माप पुस्तिका (MB) में कार्य की वास्तविक स्थिति को फर्जी तरीके से दर्ज किया गया था?
इन तमाम सवालों के घेरे में अब पंचायत के सरपंच योगेश गुप्ता और पंचायत सचिव भेरूलाल कुम्भकार की कार्यप्रणाली आ गई है।
जिम्मेदार अधिकारियों के पल्ला झाड़ने वाले जवाब
Jirapur News इस पूरे प्रकरण में जब पंचायत इंस्पेक्टर अनिल शिवहरे से बात की गई, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि राशि क्यों निकाली गई, इस बारे में केवल सचिव से ही पूछा जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि नियमानुसार यदि छह महीने तक स्वीकृत राशि के एवज में कार्य शुरू नहीं होता है, तो संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
दूसरी ओर, पंचायत सचिव भेरूलाल कुम्भकार ने खुद यह स्वीकार कर लिया है कि उनके द्वारा राशि निकाली गई थी। उनका तर्क है कि वर्तमान में निर्माण कार्य प्रगति पर है और इसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन सचिव का यह बयान अपने आप में कई नए सवाल खड़े करता है—यदि राशि अप्रैल में ही निकाल ली गई थी, तो निर्माण कार्य शुरू होने में छह महीने की देरी क्यों हुई? क्या नियमों को ताक पर रखकर कागजों में ही प्रोजेक्ट को पूरा दिखाया जा रहा था?
निष्पक्ष जांच से ही खुलेगी परतें
Jirapur News ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि सरकारी धन के इस तरह के दुरुपयोग और मनमाने भुगतान की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जिला व जनपद पंचायत के अधिकारी मामले की गहराई से जांच कर बिल-वाउचर, माप पुस्तिका और भौतिक सत्यापन कर लें, तो कई बड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।


