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Yogi Adityanath Tech Sangam: डीपफेक के सहारे नहीं बच पाएंगे अपराधी, आधुनिक तकनीक से होगी पहचान: योगी आदित्यनाथ

Yogi Adityanath Tech Sangam

Report: Vandna Rawat

Yogi Adityanath Tech Sangam उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अपराधियों की पहचान के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि एआई जांच में मददगार हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय मानव विवेक के आधार पर ही होना चाहिए। तकनीक पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय उसका उपयोग सोच-समझकर करना जरूरी है।

मुख्यमंत्री शनिवार को उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस), लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक्स और विधिक अनुपालन से जुड़े ‘LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का उद्घाटन किया। साथ ही कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च किया, ‘अभेद्य’ परियोजना की आधारशिला रखी और ‘एआई इन कंस्ट्रक्शन’ पुस्तक का विमोचन किया।

भू-माफिया से मुक्त जमीन पर विकसित हुआ फॉरेंसिक संस्थान

Yogi Adityanath Tech Sangam योगी आदित्यनाथ ने बताया कि आज जिस करीब 100 एकड़ जमीन पर विश्वस्तरीय फॉरेंसिक संस्थान स्थापित है, उस पर पहले एक भू-माफिया का कब्जा था। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2017 में पुलिस अधिकारियों से जानकारी मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि दूसरी प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आरोपी ने आत्मसमर्पण कर दिया और जमीन छोड़ दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब एक दशक पहले लखनऊ में साइबर फॉरेंसिक और क्वांटम तकनीक जैसे विषयों पर चर्चा करना भी मुश्किल लगता था। अब इसी संस्थान के माध्यम से वैज्ञानिक जांच, आधुनिक अपराध अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

‘सीआईडी’ की रील लाइफ अब वास्तविक जांच में आ रही काम

Yogi Adityanath Tech Sangam फॉरेंसिक विज्ञान की उपयोगिता बताते हुए मुख्यमंत्री ने लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘सीआईडी’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह धारावाहिक में बाल या फिंगरप्रिंट जैसे साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचते हुए दिखाया जाता था, उसी तरह आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक की मदद से वास्तविक मामलों की जांच में भी वैज्ञानिक साक्ष्य अहम साबित हो रहे हैं।

उन्होंने एक मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1980 में अपराध करने वाले एक माफिया को साक्ष्यों की कमी और डीएनए नमूने नष्ट होने के कारण वर्ष 2022 में सजा मिल सकी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह मामला दर्शाता है कि जांच के दौरान साक्ष्यों को समय पर जुटाना और सुरक्षित रखना कितना जरूरी है।

प्रदेश की 18 पुलिस रेंजों में विकसित हो रहीं फॉरेंसिक लैब

Yogi Adityanath Tech Sangam मुख्यमंत्री ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं विकसित की जा रही हैं। उनके अनुसार, इनमें से 12 प्रयोगशालाएं तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य निर्माण के अंतिम चरण में हैं। इसके अलावा 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन भी तैनात की गई हैं।

सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्य, क्वांटम तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और एआई के न्यायिक व प्रशासनिक उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक जांच और तकनीक के बेहतर समन्वय से अपराध अनुसंधान को मजबूत करने तथा न्याय मिलने में होने वाली देरी कम करने में मदद मिल सकती है।

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