Wine Shops in Residential Areas : भोपाल में आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई जारी है… आम दुकानदारों और व्यापारियों पर नियमों का डंडा चल रहा है, लेकिन इसी कार्रवाई के बीच राजधानी में शराब दुकानों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है… आखिर नियमों की यह सख्ती शराब दुकानों पर क्यों नजर नहीं आती? भोपाल में कई शराब दुकानें ऐसे इलाकों में संचालित होने के आरोप हैं, जहां आसपास आवासीय क्षेत्र हैं… कुछ दुकानें मंदिरों के नजदीक हैं, तो कुछ स्कूलों और कॉलेजेस के आसपास भी बताई जाती हैं।
बड़ा सवाल यही है कि जब आम दुकानदारों से जमीन के उपयोग और नियमों का पालन कराने के नाम पर दुकानें सील की जा रही हैं, तो फिर शराब दुकानों पर यही नियम क्यों लागू नहीं होते हैं? सवाल सीधा ये भी है किअगर नियम सबके लिए हैं, तो शराब दुकानों पर कार्रवाई में इतनी राहत क्यों? क्या राजधानी में सीलिंग के नियमों के दो अलग-अलग पैमाने हैं? स्वदेश न्यूज ने जिम्मेदारों विभागों से जवाब लेने की कोशिश की है।
सीलिंग का दोहरा मापदंड? दुकानें बंद, शराब दुकानें क्यों बेखौफ!

Wine Shops in Residential Areas : न्यू मार्केट, मालवीय नगर में शराब दुकान बनी परेशानी का सबब
न्यू मार्केट मालवीय नगर में शराब दुकान के आसपास अक्सर भीड़ और जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान के आसपास शराब का सेवन करने वालों और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी से माहौल असहज हो जाता है। खासतौर पर महिलाओं और बच्चों को यहां से गुजरने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय रहवासियों ने दुकान को दूसरी जगह शिफ्ट कराने की मांग को लेकर कई बार आंदोलन किया है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
राजू श्रीवास्तव, चक्की संचालक, मालवीय नगर
स्थानीय निवासी और चक्की संचालक राजू श्रीवास्तव ने स्वदेश न्यूज से बातचीत में कहा कि शराब दुकान के कारण इस मार्ग पर आए दिन जाम की स्थिति बनती है। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। उन्होंने मांग की कि मालवीय नगर के इस क्षेत्र में संचालित शराब दुकान को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना चाहिए।

Wine Shops in Residential Areas : 10 नंबर मार्केट, आर्य समाज मंदिर के सामने शराब दुकान
उधर कमोवेश यही स्थिति 10 नंबर मार्केट में भी बनी हुई है, यहां आर्य समाज मंदिर के सामने ही करीब 30 से 40 मीटर की दूरी पर शराब की दुकान संचालित हो रही है। जबकि प्रदेश सरकार के नियमों के तहत मंदिरों व स्कूलों से निर्धारित दूरी (आमतौर पर 50 से 100 मीटर और नई नीति के तहत प्रस्तावित 500 मीटर) का प्रावधान है। रहवासियों और महिलाओं का आरोप है कि आवासीय क्षेत्र और धार्मिक स्थल के इतने नजदीक शराब दुकान होने से यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इसके कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के सामने आए दिन शराब के नशे में विवाद की स्थिति बनती है, जिससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासतौर पर महिलाओं के लिए कई बार असहज और असुरक्षित माहौल बन जाता है। रहवासियों ने प्रशासन से शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है।

Wine Shops in Residential Areas : सीलिंग पीड़ित व्यापारियों ने भी शराब दुकानों के बेरोक टोक संचालन पर उठाए सवाल
व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम की कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों पर पड़ रहा है। कई लोगों ने दुकान के लिए बैंक से लोन लिया है, वर्षों से कारोबार कर रहे हैं और सरकार को GST, आयकर, संपत्ति कर तथा अन्य माध्यमों से टैक्स देते हैं।

अनूप राजपूत, व्यापारी, भोपाल
“सरकार छोटे व्यापारियों की दुकानों पर सीलिंग की कार्रवाई कर रही है, जबकि रहवासी कॉलोनियों में शराब की दुकानें उसी तरह चल रही हैं। हम छोटे व्यापारी भी सरकार को टैक्स देते हैं। अगर नियम सबके लिए हैं, तो कार्रवाई भी सभी पर समान रूप से होनी चाहिए। रहवासी क्षेत्र में शराब की दुकानों को प्रशासन की छूट क्यों है ?

प्राची जैन, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर
“मैं अपने पति के बिजनेस को सपोर्ट करने के लिए यहां आई हूं। सरकार को शराब की दुकानों से टैक्स मिलता है, यह अपनी जगह सही है, लेकिन छोटे व्यापारियों के लिए भी कोई समाधान निकाला जाना चाहिए। हम लोगों ने बिजनेस के लिए लोन लिया है, अब अगर दुकानें बंद हो जाएंगी तो हम लोन कैसे चुकाएंगे? हमारी समस्याओं की कोई सुनवाई नहीं हो रही है।”

अशोक गुप्ता, व्यापारी
“सरकार की कार्रवाई में भेदभाव नजर आ रहा है। अस्पताल चल रहे हैं, शराब की दुकानें भी उसी तरह संचालित हो रही हैं, लेकिन छोटे व्यापारियों की दुकानों पर कार्रवाई की जा रही है। सरकार शराब दुकानों पर इतनी मेहरबान क्यों है? प्रशासन को सभी के लिए एक समान नियम लागू करने चाहिए।”

जितेंद्र पवार, व्यापारी
“यह तो अंधेर नगरी, चौपट राजा वाली स्थिति हो गई है। हम व्यापारी ईमानदारी से अपना कारोबार करते हैं और सरकार को कई तरह के टैक्स भी देते हैं। इसके बावजूद अगर हमारी दुकानें बंद कर दी जाएंगी तो हमारे परिवारों का चूल्हा कैसे जलेगा? छोटे व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रहा है। अगर कार्रवाई हो रही है तो शराब की दुकानों पर भी समान रूप से प्रतिबंध की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? आने वाले चुनाव में व्यापारी वर्ग इसका जवाब जरूर देगा।

Wine Shops in Residential Areas : इन रहवासी क्षेत्रों में शराब दुकानों को हटाने के लिए हो चुके हैं आंदोलन
शराब दुकान को लेकर अरेरा कॉलोनी और शाहपुरा समेत अन्य रहवासी क्षेत्रों में लोगों का गुस्सा सड़क पर भी दिखाई दिया था। रहवासियों का कहना था कि स्कूल और मंदिर जैसे संवेदनशील स्थानों के पास शराब दुकानें खुलने से स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और सामाजिक माहौल को लेकर चिंता बढ़ी है। लोगों ने प्रशासन से दुकानें हटाने की मांग की थी। इसके अलावा राजधानी के मालवीय नगर, अवधपुरी और बाबड़िया कलां क्षेत्र में भी शराब दुकानों को लेकर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था.
Wine Shops in Residential Areas : जिम्मेदारों ने क्या कहा

संस्कृति जैन, कमिश्नर, नगर निगम भोपाल
उधर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने स्वदेश न्यूज से बातचीत में कहा कि सीलिंग की संपूर्ण कार्रवाई नियमों के तहत की जा रही है। शराब दुकानों के आवंटन और संचालन का मामला जिला प्रशासन द्वारा देखा जाता है। यदि इस संबंध में किसी रहवासी को दिक्कत है तो इसकी शिकायत जिला प्रशासन से करना चाहिए।

भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने स्वदेश न्यूज से बातचीत में ये कहा..
उधर भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि प्रदेश भर में आबकारी नीति के मुताबिक ही दुकानों का आवंटन होता है, फिर भी इस प्रकार की स्थिति कहीं निर्मित होती है, और कहीं भी आम लोगों द्वारा विरोध होता है तो जिला प्रशासन नियम अनुसार कार्रवाई करने के लिए बाध्य है। पॉलिसी के अनुसार जो भी कार्रवाई करनी होगी वो जरूर की जाएगी।

मध्य प्रदेश के आबकारी आयुक्त (Excise Commissioner) दीपक कुमार सक्सेना से स्वदेश न्यूज ने संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

उधर सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र सिंह धाकड़ से भी स्वदेश न्यूज ने संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने मोबाइल कॉल रिसीव नहीं किया।
Wine Shops in Residential Areas : सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है ?
सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के पॉश इलाकों में आवासीय मकानों को दुकान बनाकर व्यापार करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई 10 सदस्यीय समिति पर रोक लगाने के साथ ही हाईकोर्ट से मिले सभी स्टे ऑर्डर भी खत्म कर दिए हैं। इस मामले में सबसे बड़ा फेरबदल यह हुआ है कि जिन दुकानदारों और व्यापारियों ने विभिन्न अदालतों या हाईकोर्ट से स्टे ले रखा था, सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी स्टे ऑर्डर्स को तुरंत प्रभाव से खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से यह बात रखी गई थी कि वे कार्रवाई करना चाहते हैं, लेकिन प्रशासनिक या अन्य दबाव के कारण काम में बाधा आ रही है। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है तथा कार्रवाई में किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Bhopal Sealing Action : राजधानी में दुकानों का पूरा विवाद क्या है ?
राजधानी भोपाल के अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़िया कलां जैसे पॉश और रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से दुकानें, कमर्शियल ऑफिस और शोरूम संचालित हो रहे हैं। इनकी संख्या 30 हजार से भी अधिक बताई जा रही है। इन अवैध कमर्शियल गतिविधियों के कारण स्थानीय रहवासियों को ट्रैफिक जाम, पार्किंग की भारी समस्या और सुरक्षा के संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिसके विरोध में रहवासियों ने लगातार प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई लड़ी।
Bhopal Sealing Action : सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की ये जवाबदेही तय की है !
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का एक महत्वपूर्ण पहलू सिर्फ अवैध निर्माण या भूमि उपयोग पर कार्रवाई नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी है। कोर्ट ने कहा है कि अगर अनधिकृत निर्माण या भूमि उपयोग का उल्लंघन अधिकारियों की निगरानी में होता रहा और समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने अधिकारियों को कानून और निर्धारित शहरी नियोजन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
Bhopal Sealing Action : इस भेदभावपूर्ण कार्रवाई और नियमों के कथित दोहरे मापदंड को लेकर स्वदेश न्यूज जिम्मेदारों से सवाल पूछता रहेगा। हमारा सवाल साफ है, अगर नियम सबके लिए समान हैं, तो कार्रवाई भी समान क्यों नहीं?
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई कानून और मास्टर प्लान के पालन की दिशा में जरूरी कदम है। लेकिन इस कार्रवाई के बीच शराब दुकानों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना भी उतना ही जरूरी है। जब छोटे दुकानदारों पर नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर कार्रवाई हो सकती है, तो आवासीय क्षेत्रों में संचालित शराब दुकानों की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं?
स्वदेश ने जब जिम्मेदार विभागों से इस मामले में जवाब जानने की कोशिश की, तो स्पष्ट जवाब के बजाय जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की स्थिति नजर आई। इससे पूरी कार्रवाई की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि नियम किसके लिए हैं और उनका पालन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। यदि कोई शराब दुकान कानून, भूमि उपयोग या मास्टर प्लान का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। राजस्व महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण नागरिकों का सुरक्षित और व्यवस्थित जीवन है।


