Raipur Law and Order : कई जगह मामूली विवाद, अंजाम खौफनाक,पेट्रोलिंग, मॉनिटरिंग, पुलिसिंग पर सवाल
Raipur Law and Order : राजधानी रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम लागू हुए 221 दिन पूरे हो चुके हैं…लेकिन इसी दौरान सामने आई 21 हत्याओं ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे ज्यादा चिंता अगस्त के आंकड़ों को लेकर है…जब एक ही महीने में रायपुर मे करीब 15 हत्याएं सामने आईं। ज्यादातर मामलों में वजह कोई बड़ी दुश्मनी नहीं थी…कहीं पैसों का विवाद, कहीं महिलाओं को लेकर झगड़ा, तो कहीं पारिवारिक और आपसी विवाद खूनी वारदात में बदल गया। विपक्ष पुलिसिंग पर सवाल उठा रहा है, तो बीजेपी सरकार और पुलिस की कार्रवाई को गिना रही है। आखिर राजधानी में छोटे-छोटे विवाद हत्या तक क्यों पहुंच रहे हैं ? और विपक्ष को सवाल उठाने का मौका क्यों मिल रहा है। इसी पर करेंगे चर्चा लेकिन पहले देखिए ये रिपोर्ट।।।
Raipur Law and Order : राजधानी में 221 दिन…और 21 हत्याएं। कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद रायपुर में अब तक 21 हत्या के मामले सामने आ चुके हैं। इनमें अकेले अगस्त में 15 हत्याएं हुईं। यानी कुल हत्याओं का आधे से ज्यादा आंकड़ा सिर्फ एक महीने में सामने आया। 29 जनवरी को कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के महज छह दिन बाद … इन वारदातों को लेकर पुलिस का दावा है कि गंभीर वारदातों में तत्काल कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ पेट्रोलिंग और निगरानी बढ़ाई गई है। गुंडा और निगरानी बदमाशों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। पुलिस के मुताबिक अब तक सामने आए ज्यादातर मामलों में आरोपी और मृतक एक-दूसरे के परिचित थे और आपसी रंजिश या विवाद ही वारदात की वजह बना।
Raipur Law and Order : यानी विवाद छोटा था…लेकिन अंजाम बेहद खौफनाक।…इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार और पुलिस पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता कन्हैया अग्रवाल का आरोप है कि राजधानी में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। सट्टा, अवैध शराब, गांजा और जुए जैसे कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से हालात बिगड़ रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता अमित श्रीवास्तव ने कमिश्नरेट सिस्टम की तैयारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ व्यवस्था बदलने से अपराध नहीं रुकेंगे। उधर कांग्रेस के आरोपों के बीच बीजेपी… सरकार और पुलिस के बचाव में उतरी। बीजेपी का कहना है कि पिछली सरकार के दौरान अपराधियों के हौसले बुलंद थे। मौजूदा सरकार में पुलिस सिर्फ वारदात के बाद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही…बल्कि अपराध रोकने के लिए भी लगातार कार्रवाई कर रही है। कुल मिलाकर रायपुर में हो रहे वारदात के आंकड़े निश्चित तौर पर चिंता बढ़ाते हैं।लेकिन सवाल सिर्फ हत्या के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी का नहीं है…सवाल ये है कि मामूली विवाद आखिर हत्या तक क्यों पहुंच रहे हैं ? पुलिस कार्रवाई का दावा कर रही है…कांग्रेस कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रही है…और बीजेपी सरकार के बचाव में है। लेकिन सियासी बयानबाजी के बीच राजधानी के सामने असली चुनौती अपराधियों पर एक्शन की है।


