PM Modi: संसद के संभावित विशेष सत्र को लेकर जारी चर्चाओं के बीच परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि परिसीमन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को संसद में रखने से पहले सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को पर्याप्त समय मिलना चाहिए, ताकि वे उसके प्रभावों का अध्ययन कर सकें।
खरगे ने अपने पत्र में परिसीमन को बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक विषय बताया है। उन्होंने कहा कि इसका असर केवल संसद की सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्यों के प्रतिनिधित्व और देश की राजनीतिक व्यवस्था पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
PM Modi: खरगे ने 16 जुलाई के पत्र का भी किया जिक्र
मल्लिकार्जुन खरगे ने 27 अगस्त को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि वह इससे पहले 16 जुलाई को भी परिसीमन को लेकर अपनी चिंताएं सरकार के सामने रख चुके हैं। उस समय भी उन्होंने प्रधानमंत्री से सभी दलों को साथ लेकर चर्चा करने और किसी प्रस्ताव को जल्दबाजी में आगे नहीं बढ़ाने का अनुरोध किया था।
खरगे के मुताबिक राजनीतिक दलों को किसी भी नए प्रस्ताव पर अपनी राय तैयार करने के लिए पर्याप्त वक्त मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा से पहले संबंधित राज्यों और राजनीतिक दलों के साथ संवाद की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए।
PM Modi: विशेष सत्र की चर्चा के बीच उठी मांग
केंद्र सरकार की ओर से संसद के संभावित विशेष सत्र को लेकर दिए गए संकेतों के बीच कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर अपनी मांग तेज कर दी है। खरगे ने अपने पत्र में कहा कि अगर विशेष सत्र बुलाया जाता है तो उससे पहले इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक बातचीत होनी चाहिए।
कांग्रेस नेता का तर्क है कि परिसीमन का विषय कई राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे केवल संसद के भीतर चर्चा तक सीमित रखने के बजाय पहले व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
PM Modi: कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर रखी तीन प्रमुख बातें
खरगे ने पत्र के जरिए कांग्रेस की स्थिति भी स्पष्ट की है। पार्टी ने परिसीमन की प्रक्रिया के दौरान लोकसभा में मौजूदा प्रतिनिधित्व को लेकर कुछ अहम सुझाव रखे हैं।
पहला सुझाव यह है कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बढ़ाया न जाए। कांग्रेस का कहना है कि सीटों की कुल संख्या में बदलाव से जुड़े फैसले को लंबे समय के लिए स्थिर रखा जाना चाहिए।
दूसरे सुझाव में राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के मौजूदा अनुपात को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की बात कही गई है। यानी परिसीमन के बाद किसी राज्य के मौजूदा प्रतिनिधित्व में अचानक बड़ा बदलाव नहीं होना चाहिए।
तीसरी मांग महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी है। कांग्रेस चाहती है कि लोकसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण की व्यवस्था 2029 के आम चुनाव से लागू की जाए।
PM Modi: राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर कांग्रेस की चिंता
परिसीमन की प्रक्रिया में राज्यों की लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और अन्य सामाजिक लक्ष्यों पर बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से नुकसान नहीं होना चाहिए।
खरगे ने इसी वजह से मौजूदा सीट हिस्सेदारी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की मांग की है। उनका कहना है कि इस विषय पर राज्यों की चिंताओं को भी चर्चा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
PM Modi: जल्दबाजी में फैसला नहीं चाहती कांग्रेस
खरगे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। इससे उन्हें प्रस्तावों के संवैधानिक, प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभावों को समझने का अवसर मिलेगा।
कांग्रेस का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश होनी चाहिए। पार्टी ने संकेत दिया है कि वह परिसीमन के मुद्दे पर सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर करीबी नजर रखेगी।
PM Modi: परिसीमन का असर क्यों महत्वपूर्ण है
परिसीमन का सीधा संबंध लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा उनके प्रतिनिधित्व से होता है। इसमें आबादी और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाता है। इसलिए इसकी प्रक्रिया का असर चुनावी राजनीति और राज्यों के प्रतिनिधित्व पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
यही वजह है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पहले से राजनीतिक चर्चा चाहती है। पार्टी के अनुसार सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ने से संभावित विवादों और राज्यों की आपत्तियों को समय रहते समझा जा सकेगा।
PM Modi: अब सरकार के रुख पर नजर
खरगे के पत्र के बाद अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि क्या सरकार परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाती है और राजनीतिक दलों को चर्चा के लिए औपचारिक मंच उपलब्ध कराती है।
संसद के विशेष सत्र को लेकर यदि आगे कोई निर्णय होता है, तो परिसीमन का मुद्दा उसके संभावित एजेंडे में महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। फिलहाल कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस प्रक्रिया में व्यापक राजनीतिक सहमति और पर्याप्त विचार-विमर्श की पक्षधर है।




