Report: Alok Bhardwaj
Poison Injection Threat मध्य प्रदेश के भिंड जिला चिकित्सालय से मानवता को शर्मसार करने वाली और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक बेहद सनसनीखेज खबर सामने आई है। अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर वार्ड में पेट दर्द की शिकायत के बाद भर्ती कराई गई चार मासूम बच्चियों की हालत एक कथित गलत इंजेक्शन लगने के बाद अचानक बेहद गंभीर हो गई। इस बड़ी लापरवाही पर जब पीड़ित परिजनों ने डॉक्टरों और स्टाफ से मदद की गुहार लगाई, तो उनके साथ दुश्मनों जैसा बर्ताव किया गया। वार्ड में तैनात महिला स्टाफ ने अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए परिजनों को धमकी दे डाली कि ‘अगर ज्यादा परेशान किया, तो मरीज को जहर का इंजेक्शन लगा देंगे।’

मामला बिगड़ता देख अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में दो बच्चियों को ग्वालियर रैफर कर दिया है, जबकि शेष दो को भी ग्वालियर भेजने की तैयारी की जा रही है।
Poison Injection Threat पेट दर्द से पीड़ित होकर आई थीं बच्चियां, इंजेक्शन लगते ही बिगड़ी तबीयत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भिंड जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर वार्ड में पेट दर्द से पीड़ित चार बच्चियों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि बच्चियां सामान्य थीं, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने जैसे ही उन्हें एक इंजेक्शन दिया, उसके कुछ ही मिनटों बाद चारों बच्चियों की हालत अचानक तेजी से बिगड़ने लगी। बच्चियों की छटपटाहट और गंभीर स्थिति को देखकर वार्ड में चीख-पुकार मच गई। घबराए परिजनों ने तुरंत डॉक्टरों को बुलाने की मांग की, लेकिन जिम्मेदारों ने समय पर सुध लेने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया।

Poison Injection Threat ‘लगा देंगे जहर का इंजेक्शन’— महिला मेडिकल वार्ड के स्टाफ का शर्मनाक रवैया
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाला और शर्मनाक पहलू अस्पताल के महिला मेडिकल वार्ड में कार्यरत स्टाफ का रवैया रहा। पीड़ित परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए मीडिया को बताया कि जब वे अपनी तड़पती हुई बच्चियों के लिए स्टाफ के पास मिन्नतें करने पहुंचे, तो वहां मौजूद महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उनके साथ अमानवीय और क्रूर व्यवहार किया। स्टाफ ने परिजनों को डांटते हुए खुलेआम धमकी दी कि ‘ज्यादा परेशान करोगे या चिल्लाओगे, तो मरीज को जहर का इंजेक्शन लगा देंगे।’ इस धमकी के बाद से पीड़ित परिवार बेहद डरा और सहमा हुआ है।
Poison Injection Threat जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर ग्वालियर किया रैफर, प्रबंधन ने रोया डॉक्टरों की कमी का रोना
अस्पताल परिसर में हंगामा बढ़ता देख और बच्चियों की नाजुक स्थिति को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने अपनी नाकामी छिपाने का शॉर्टकट रास्ता अपनाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार या मामले की आंतरिक जांच करने के बजाय तत्काल दो बच्चियों को गंभीर हालत में ग्वालियर के जेएएच (JAH) अस्पताल के लिए रैफर कर दिया। वहीं, अस्पताल में भर्ती बाकी दो अन्य बच्चियों की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए प्रबंधन उन्हें भी ग्वालियर भेजने की कागजी तैयारी पूरी कर चुका है।
जब इस पूरे प्रशासनिक और चिकित्सीय गतिरोध पर जिला चिकित्सालय प्रबंधन से तीखे सवाल पूछे गए, तो उन्होंने अपनी कमजोरियों और स्टाफ की इस गुंडागर्दी पर पर्दा डालते हुए हमेशा की तरह अस्पताल में ‘चिकित्सकों की भारी कमी’ का पुराना हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
बदहाली पर उठते 3 तीखे सवाल
- इंजेक्शन की जांच क्यों नहीं?: वह कौन सा इंजेक्शन था जिसके लगते ही एक साथ चार बच्चियों की हालत गंभीर हो गई? क्या उस बैच की दवाओं की कोई फॉरेंसिक या ड्रग विभाग द्वारा जांच की जाएगी?
- धमकी देने वाले स्टाफ पर एक्शन कब?: मरीजों के परिजनों को ‘जहर का इंजेक्शन’ देने की सरेआम धमकी देने वाली महिला स्टाफ के खिलाफ सिविल सेवा नियमों के तहत तत्काल निलंबन और एफआईआर (FIR) की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
- रैफरल अस्पताल की मजबूरी कब तक?: मामूली पेट दर्द के मरीजों को भी सीधे ग्वालियर रैफर कर देने के बाद भिंड जिला अस्पताल के करोड़ों रुपये के बजट और बुनियादी ढांचे की उपयोगिता पर सवाल क्यों न खड़े किए जाएं?





