‘उठो’ जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए: स्वामी विवेकानंद

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स्वामी विवेकानंद जयंती को हम युवा दिवस के रूप में मनाते है। उनका जीवन और विचार हर किसी के लिए प्ररेणा का स्त्रोत है। ऐसे में आज का दिन हमें अवसर देता है कि युवा दिवस की शुभकामनाओं के साथ हम स्वामी विवेकानंद के विचारों को याद करें। बता दें कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने भीतर विश्वास रखने की प्ररेणा दी। उनका कहना था कि ‘उठो’ जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।

1846 के शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में किया हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनका असली नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। बाद में सांसारिक मोह माया को त्याग कर उन्हें संन्यास ले लिया और गुरु रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बन गए। उन्हें रामकृष्ण मठए रामकृष्ण मिशन और वेदांत सोसाइटी की स्थापना की। 1893 में अमेरिका के शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में उन्होंने भारत और हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व किया।

25 साल की उम्र में सन्यासी बन गए थे स्वामी विवेकानंद


कोलकाता में जन्मे नरेंद्रनाथ, जिन्हें हम स्वामी विवेकानंद के नाम से जानते हैं, अपनी माँ के धार्मिक विचारों से बहुत प्रभावित थे। माँ की पूजा.पाठ में रुचि ने नरेंद्रनाथ को भी धर्म की ओर आकर्षित किया। बचपन से ही वे अच्छे संस्कारों में पले.बढ़े। इसी वजह से कम उम्र में ही, केवल 25 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को त्याग दिया। सांसारिक मोह.माया को छोड़कर वे ज्ञान की तलाश में निकल पड़े। स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए एक आदर्श हैं। उनका जीवन प्रेरणा देता है। इसलिए हर साल उनकी जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है।

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