Operation Sindoor Martyrs Controversy : 6 शहीद जवानों का नाम वॉर मेमोरियल में दर्ज ,पक्ष-विपक्ष के अपने अपने तर्क, क्या है सच ?
Operation Sindoor Martyrs Controversy : ऑपरेशन सिंदूर में भारत के 6 शहीद जवानों के नाम सार्वजनिक करने के बाद विवाद हो गया है। कांग्रेस ने सरकार पर शहीदों के नाम छिपाने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, ‘सरकार ने इन जवानों की शहादत एक साल तक सार्वजनिक नहीं की। उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।’ उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए एक बयान का वीडियो शेयर किया। इसमें राजनाथ सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा। कांग्रेस का आरोप है कि या तो रक्षा मंत्री को उस समय छह जवानों की शहादत की जानकारी नहीं थी या उन्होंने संसद को गुमराह किया। दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं।’ इन आरोपों के बीच रक्षा मंत्रालय ने कहा कि राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

Operation Sindoor Martyrs Controversy : मंत्रालय के मुताबिक, 11 मई 2025 को हुई आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) ने इन छह जवानों को श्रद्धांजलि दी थी। इसके बाद 14 अगस्त 2025 की प्रेस विज्ञप्ति में उन्हें वीरता पुरस्कार दिए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक की गई थी। भारतीय सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शहीदों को तुरंत श्रद्धांजलि दी गई थी। 8 अक्टूबर 2025 को वायुसेना प्रमुख ने वायुसेना के शहीद सार्जेंट के परिजन को सम्मानित किया। 15 जनवरी 2026 को जयपुर में सेना दिवस परेड के दौरान सेना प्रमुख ने तीन शहीदों के परिजनों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम दर्ज करने की एक तय प्रक्रिया और प्रोटोकॉल है। सभी नाम उसी प्रक्रिया के तहत दर्ज किए जाते हैं। इसलिए यह कहना कि नाम दर्ज करने में देरी हुई या शहीदों को अब पहली बार सम्मान मिला है, सही नहीं है। बहरहाल एक बार फिर ऑपरेशन सिन्दूर पर चर्चा है और शहीदों की जानकारी छुपाने पर घमासान…विपक्ष और सरकार के तर्क के बाद कौन सही है और कौन गलत ये बड़ा सवाल बन गया है |

