Report: Neha gupta
Bhojpur बिहार के भोजपुर (आरा) जिले सहित पूरे राज्य में बुधवार को दवा दुकानों की देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। ई-फार्मेसी (ऑनलाइन दवा बिक्री) के बढ़ते चलन और कॉरपोरेट एकाधिकार के विरोध में ‘बिहार केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन’ और ‘ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स’ (AIOCD) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर जिले के लगभग सभी निजी मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे। इस अचानक हुई बंदी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा और दवा खरीदने पहुंचे मरीजों व उनके तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

Bhojpur थमी दवाओं की रफ्तार: बुजुर्गों, बच्चों और नियमित मरीजों की बढ़ी परेशानी
बुधवार सुबह से ही आरा शहर के प्रमुख बाजारों, अस्पताल रोड और मोहल्लों की दवा दुकानें बंद दिखाई दीं। इसके चलते उन मरीजों और परिजनों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी जो नियमित रूप से (बीपी, शुगर, दिल की बीमारी आदि की) दवाएं लेते हैं। बुजुर्गों और बच्चों के परिजन जरूरी दवाओं के लिए तपती धूप में एक दुकान से दूसरी दुकान भटकते नजर आए। अचानक आई इस बंदी ने आम नागरिकों की चिंता और आपाधापी को काफी बढ़ा दिया।

Bhojpur ऑनलाइन दवा व्यापार से छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट
हड़ताल पर बैठे दवा विक्रेताओं और संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि बिना किसी कड़े नियम और पर्याप्त निगरानी के धड़ल्ले से चल रहे ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स ने छोटे और मध्यम स्तर के केमिस्ट दुकानदारों के पारंपरिक व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित किया है। दवा दुकानदारों का आरोप है कि ऑनलाइन माध्यमों से दवाओं की अनियंत्रित बिक्री न केवल उनके रोजगार को निगल रही है, बल्कि बिना डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के दवाओं की होम डिलीवरी आम मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

Bhojpur आपातकालीन दुकानों से मिली मामूली राहत, कड़े कानून की मांग
Bhojpur दवा विक्रेता संघ ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि देश में ई-फार्मेसी के संचालन को लेकर बेहद कड़े और पारदर्शी नियम बनाए जाएं और अवैध रूप से चल रहे ऑनलाइन दवा कारोबार पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।
राहत की बात यह रही कि आम जनता की बेहद गंभीर स्थिति को देखते हुए विभिन्न सरकारी व निजी अस्पताल परिसरों के भीतर संचालित दवा दुकानें और आपातकालीन (Emergency) मेडिकल स्टोर्स खुले रखे गए थे, जिससे गंभीर मरीजों को जीवन रक्षक दवाएं मिल सकीं। इसके बावजूद, मुख्य बाजारों में सन्नाटा पसरे रहने से आम जनजीवन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
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